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Waqt Sakshi Hai (वक्त साक्षी है)

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“कठिन समय के कठिन पलों में,

यदि तुझमें कुछ साहस है बाक़ी ।

ज़िन्दा रहने की ज़िद तुझमें,

और जीवन का विश्वास है बाक़ी ।

ऐसा कोई समय नहीं बन्धु,

जिसका कोई अन्त नहीं ।

जीवन फिर रोशनी पाता है,

यदि जीने का प्रयास है बाक़ी ।

कठिन समय के अन्तराल में,

ऐसे भी क्षण आते रहते हैं।

दिल-दिमाग़ जब थम जाता है,

बस जीवन का आभास है बाक़ी।

देख क्षितिज पर फैली रोशनी,

सुबह का सूरज फिर चमकेगा ।

लिख देंगी फिर भोर की किरणें,

जो तेरा इतिहास है बाक़ी ।

(इसी संग्रह से )”

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

D. P. Yadav (डी.पी. यादव)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

184

Year/Edtion

2023

Subject

Poetry

Contents

N/A

About Athor

"जन्म उत्तर प्रदेश के एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार में।
शिक्षा : एम.एम.एच. महाविद्यालय, गाज़ियाबाद से स्नातक एवं बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, काशी से अंग्रेज़ी साहित्य में परास्नातक ।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी। समाजसेवक, राजनीतिज्ञ, कई शैक्षणिक संस्थाओं एवं उद्योगों के संस्थापक । जन सरोकारों और सिद्धान्तों की राजनीति के लिए देश भर में बहुचर्चित । बॉलीबॉल के राष्ट्र स्तरीय एवं कबड्डी के राज्य स्तरीय खिलाड़ी रहे।
राजनैतिक यात्रा : एम.एम.एच. महाविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष पद से राजनीति में पदार्पण। 1985 में निर्विरोध शर्फाबाद ग्रामसभा के प्रधान पद पर निर्वाचित हुए। 1987 में बिसरख के ब्लॉक प्रमुख चुने गये। 1989 में बुलन्दशहर सीट से निर्वाचित होकर उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य (विधायक) बने और तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मन्त्री बनाये गये। तब से लेकर कुल चार बार विधायक, एक बार लोकसभा सांसद और एक बार राज्यसभा सांसद चुने गये। संसदीय कार्यकाल के दौरान कई महत्त्वपूर्ण संसदीय कमेटियों के सदस्य बनाये गये।
विधायक, मन्त्री, सांसद रहते हुए जनआकांक्षाओं पर पूरी तरह खरे उतरने एवं जनकल्याण के अनेक कार्य कराने के कारण समाज में विशेष सम्मान एवं ख्याति । अपने क्रान्तिकारी विचारों और चलाग-लपेट भाषण शैली के कारण युवाओं में खासे लोकप्रिय ।
प्रकृति के प्रति अगाध प्रेम एवं मानव मात्र के प्रति करुणा उनकी कविताओं में प्रकट हुई है। कविता को आमजन की पीड़ा से जुड़ने का सशक्त माध्यम मानते हैं।"

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