| उसकी कहानी – स्थितियों से शुरू होकर चरित्र तक पहुँचना हो या चरित्र से शुरू होकर स्थितियों तक, ‘उसकी कहानी की कहानियाँ गहरा आकर्षण लिए हैं। चरित्र की परतों को खोलते हुए, उसकी वास्तविक और मूल चेतना तक पहुँचना इनमें से अधिकांश कहानियों का गन्तव्य रहा है जिसमें यह काफ़ी हद तक सफल भी हुई हैं। इन कहानियों में ख़ास तरह की चमक मौजूद है जो इधर लिखी जा रही कहानियों में कम ही नज़र आती है। यह चमक कहीं खिलंदड़ेपन की है तो कहीं नज़र न आने वाले प्रयोगों की, कहीं भाषा की अलमस्ती की है। तो कहीं चरित्र के फ़क्कड़पन की, कहीं कहन के अनूठेपन की है तो कहीं सादगी भरी आत्मीयता की। सम्बन्धों की पड़ताल करनी हो या तेज़ी से बदलते समय में आउटडेटेड हो गये चरित्रों की पहचान, पारदर्शी क्षणों को कहानी में पिरोना हो या स्मृतियों के सहारे कथा स्थितियाँ उभारना, यह कहानिँ कथाकार की बहुमुखी प्रतिभा की बानगी प्रस्तुत करती है। हमारा यह समय इन कहानियों में ऐसे उतरा है कि पाठक ख़ुद को एक हिस्सा ही मान बैठेगा। |
| author | Mahendra Vashistha (महेन्द्र वशिष्ठ) |
|---|---|
| publisher | Vani Prakashan |
| language | Hindi |
| pages | 124 |















