“मुझे उसी शहर में –
मुझे उसी शहर में उपन्यास की समूची संरचना ने बहुत आकर्षित किया। यह उपन्यास हिन्दुस्तान के एक छोटे कस्बाई शहर की ज़िन्दगी को पूरी समग्रता के साथ उसके व्यक्तियों, परिवारों, कारीगरों, शिल्पियों, अख़बारनवीसों के माध्यम से उजागर करता है। एक गहरा व्यंग्य, उल्लास और विनोद जिसे हम अंग्रेज़ी में ‘विट’ कहते हैं, हिन्दी के उपन्यासों में ऐसा ‘विट’ कभी पहले रेणु के उपन्यासों में होता था, जिसकी झलक बहुत अरसे बाद मुझे इस उपन्यास में दिखायी दी।
एक लेखक मानवीय यूनिवर्सल दृष्टि के आधार पर अपने विशिष्ट स्थानीय अनुभवों के माध्यम से मनुष्य का समूचा और समग्र सत्य प्राप्त करने में सफल होता है। जो लोग इस स्थानीय जीवन की मिट्टी में बसे हुए हैं और उसके आधार पर अपनी भाषा रचते हैं; ध्रुव शुक्ल ऐसे ही लेखकों में हैं। उनकी कहानियाँ एक परम्परा का प्रतिनिधित्व करती हैं और वह परम्परा है भारतीयता और उसके आस्वाद की। -कथाकार निर्मल वर्मा
ध्रुव शुक्ल की कविता की दुनिया में देवता, पूर्वज, स्थान और स्मृतियाँ रसी-बसी हैं और उनके अचूक रचाव से ही वे अपने समय, समाज और स्वयं अपनी स्थिति को देखते-दिखाते हैं। यह कठिन समय में भी सम्भव सुन्दरता, निहायत गद्याक्रान्त परिस्थिति में भी छन्दपरकता, निपट साधारण में भी महिमा देखने के प्रति चौकन्नी कविता है। अपने संयत और सक्षम कौशल से ध्रुव शुक्ल ने ऐसे बहुत कुछ को कविता में जगह देकर मानो बचाया है जो आधुनिकता आदि की झोंक में हमारी कविता से अक्सर बाहर रह जाता है। -कवि-आलोचक अशोक वाजपेयी
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| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Dhruv Shukl (ध्रुव शुक्ल) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 234 |
| Year/Edtion | 2011 |
| Subject | Novel / Poems / Stories |
| Contents | N/A |
| About Athor | N/A |















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