100% Money back

Search

Need help? 9990860860 Nanhi Shop
Need help? 9990860860 Nanhi Shop

10 in stock

Nibandhon Ki Duniya : Sumitra Nandan Pant (निबन्धों की दुनिया : सुमित्रानन्दन पन्त )

Original price was: ₹395.00.Current price is: ₹256.00.

Clear
Compare

“निबन्धों की दुनिया – सुमित्रानन्दन पन्त –
हिन्दी जगत सुमित्रानन्दन पन्त के गद्य से प्रायः कम परिचित रहा है। पन्तजी ने अपने अनेक काव्य संग्रहों की लम्बी-लम्बी भूमिकाएँ लिखी हैं ‘पल्लव’ की भूमिका- ‘प्रवेश’ को तो छायावाद का घोषणापत्र कहा गया है। उन्होंने अनेक आलोचनात्मक निबन्ध लिखे हैं। वार्ताएँ और अभिभाषण दिये हैं। उनकी कुछ कहानियाँ और उपन्यास भी मिलते हैं। इन सबसे ये अपने समकालीन जयशंकर प्रसाद या सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ के समान कवि-आलोचक या कवि-कथाकार ठहराये जायें या न ठहराये जायें पर उपर्युक्त भूमिकाओं एवं निबन्धों में इनकी सूक्ष्म पर्यवेक्षण दृष्टि तथा आलोचना क्षमता का परिचय अवश्य मिलता है। कथनीय है कि सुमित्रानन्दन पन्त ने अपने समय की समस्याओं, वाद-विवादों, अगली पीढ़ी के कवियों पर भी अपनी बेबाक राय दी है। हिन्दी कविता में ‘राष्ट्रीयता की भावना’ अथवा ‘राष्ट्रवाद की प्रवृत्ति’ जैसे विषय हो अथवा ‘हिन्दी-उर्दू विवाद’ या खड़ी बोली से समन्वित ‘व्यापक स्वरूप वाली हिन्दी भाषा’ इन सब पर पन्त जी के विचार महत्त्वपूर्ण हैं। राष्ट्रीयता की प्रवृत्ति हो या राष्ट्रभाषा हिन्दी-इन विषयों पर वे संकीर्ण या कट्टर दृष्टिकोण नहीं अपनाते। वे व्यापक फलक पर अपने विचार प्रकट करते हैं। उन्होंने अपने समय की खड़ी बोली हिन्दी में हो रही काव्यरचना की सूक्ष्म विवेचना की है। कविता में आ रहे नवीन शब्द प्रयोग, ध्वनि-सजगता, चित्रमयता, लाक्षणिकता, सांगीतिकता आदि का अन्तर्दृष्टि सम्पन्न विवेचन किया है तो दूसरी ओर प्रकृति की रहस्यमयता के सहज स्वाभाविक चित्रों का उद्घाटन भी। यह सब छायावादी कविता को विशिष्ट बनाते हैं। इसे पहले-पहल पन्त जी ने पकड़ा। छायावाद के बाद की कविता पर भी उनकी पैनी दृष्टि रही है। उनके निबन्धों में अपने समसामयिक रचनाकारों बच्चन, नरेन्द्र शर्मा आदि पर की गयी टिप्पणियाँ पर्याप्त महत्त्वपूर्ण हैं-इन पर प्रायः व्यापक हिन्दी पाठक वर्ग की दृष्टि नहीं गयी है। प्रस्तुत संकलन सुमित्रानन्दन पन्त के इसी प्रकार के आलोचनात्मक निबन्धों-टिप्पणियों का संग्रह है जिससे उनका निबन्धकार एवं कवि-चिन्तक रूप उभरकर सामने आता है।

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Editor Nirmala Jain (सम्पादक : निर्मला जैन)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

144

Year/Edtion

2012

Subject

Essays

Contents

N/A

About Athor

"निर्मला जैन (प्रधान सम्पादक) –
'निबन्धों की दुनिया' श्रृंखला की प्रधान सम्पादक निर्मला जैन हिन्दी के विशिष्ट आलोचकों में हैं। वे दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दी की प्रोफ़ेसर और विभागाध्यक्ष रही हैं। निर्मला जैन ने बहुत-सी किताबें लिखी हैं तथा अनेक महत्त्वपूर्ण रचनाओं का अनुवाद और कई पुस्तकों का सम्पादन किया है। उनकी कुछ प्रमुख रचनाएँ हैं: रस सिद्धान्त और सौन्दर्यशास्त्र, उदात्त के विषय में (लॉगिनुस की मूल पुस्तक के अनुवाद सहित), काव्य चिन्तन की पश्चिमी परम्परा और कथाप्रसंग : यथाप्रसंग। निर्मला जैन को अनेक सम्मानों तथा पुरस्कारों से समादृत किया गया है।

हरिमोहन शर्मा (सम्पादक) –
जन्म: अप्रैल, 1952। मंडावर, ज़िला बिजनौर (उत्तर प्रदेश)।
शिक्षा: एम.ए., पीएच.डी., दिल्ली विश्वविद्यालय से।
प्रकाशित कृतियाँ :
आलोचना: उत्तर छायावादी काव्य-भाषा, रचना से संवाद, नरेन्द्र शर्मा (साहित्य अकादेमी से प्रकाशित मोनोग्राफ़)
सम्पादन सार्थक (साहित्यिक पत्रिका); चन्द्रशेखर वाजपेयी कृत रसिक विनोद, साहित्य, इतिहास और आधुनिक-बोध।
अनुवाद: आधुनिक पोलिश कविताएँ, मज़ाक (मिलान कुदरा का उपन्यास)।
1973 से दिल्ली विश्वविद्यालय के रामलाल आनन्द कॉलेज के हिन्दी विभाग में प्राध्यापक। 1990-1995 वार्सा विश्वविद्यालय, वार्सा (पोलैंड) में अतिथि प्रोफ़ेसर।
सुमित्रानन्दन पन्त –
सुमित्रानन्दन पन्त (1900-1977) ने अपने जीवन काल में अट्ठाईस प्रकाशित पुस्तकों की रचना की जिनमें कविताएँ, पद्य-नाटक और निबन्ध सम्मिलित हैं। हिन्दी साहित्य की इस अनवरत सेवा के लिए उन्हें पद्मभूषण (1961), ज्ञानपीठ (1968), साहित्य अकादेमी तथा सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार जैसे उच्च श्रेणी के सम्मानों से प्रतिष्ठित किया गया।
उनका रचा हुआ सम्पूर्ण साहित्य सत्यम शिवम सुन्दरम के आदर्शों से प्रभावित होते हुए भी समय के साथ निरन्तर बदलता रहा है। आपकी प्रारम्भिक कविताओं में प्रकृति एवं सौन्दर्य के रमणीय चित्र मिलते हैं, फिर छायावाद की सूक्ष्म कल्पनाओं एवं कोमल भावनाओं के और इसके बाद प्रगतिवाद की विचारशीलता के अन्त में अरविन्द दर्शन से प्रभावित मानव कल्याण सम्बन्धी विचारधारा को आपके काव्य में स्थान मिला।
अल्मोड़ा ज़िले के कौसानी ग्राम की मनोरम घाटियों में जन्म लेने वाले सौन्दर्यवादी सुमित्रानन्दन पन्त अपने विस्तृत वाङ्मय में एक विचारक, दार्शनिक और मानवतावादी के रूप में सामने आते हैं किन्तु उनकी सबसे कलात्मक कविताएँ 'पल्लव' में संकलित हैं जो 1918 से 1925 तक लिखी गयी 82 कविताओं का संग्रह है।
आधी शताब्दी से भी लम्बे आपके रचना-कर्म में आधुनिक हिन्दी कविता का एक पूरा युग समाया हुआ है।

"

Reviews

There are no reviews yet.

Write a review

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Bestsellers

Ravindra Nath Tagore Rachnawali - Do Bahan, (Part-50)

Original price was: ₹60.00.Current price is: ₹48.00.
(0 Reviews)

A Colour Handbook on Fundamentals of Entomology

Original price was: ₹3,995.00.Current price is: ₹2,996.00.
(0 Reviews)

Ravindra Nath Tagore Rachnawali - Tash Ka Desh (Part-6)

Original price was: ₹60.00.Current price is: ₹48.00.
(0 Reviews)

Ve Din by Nirmal Verma

Original price was: ₹250.00.Current price is: ₹200.00.
(0 Reviews)

Maru Kesari (मरु-केसरी)

Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹130.00.
(0 Reviews)

Back to Top
Product has been added to your cart