“मानक हिन्दी –
उत्तर प्रदेश की भाषा मुख्यतः हिन्दी है परन्तु स्थानीय बोलियाँ कई हैं। एक कहावत है : ‘हर बारह कोस पर बोली बदल जाती है।’ इस प्रकार तो इस प्रदेश की उपभाषाएँ ही असंख्य हो जायेगी। परन्तु मान लीजिए कि इस प्रान्त को हम भाषा के आधार पर तीन भागों में बाँटते हैं पश्चिमी भाग, मध्य भाग और पूर्वी भाग। पश्चिमी भाग में कहते हैं : ‘हम नहीं जायेंगे’, मध्य भाग में कहेंगे: ‘हम नाही जइहैं। और पूर्वी भाग वाले कहते हैं : ‘हम नाहीं जाइब।’ ये तीनों स्थानीय बोलियाँ अलग हैं, किन्तु भाषा तीनों की हिन्दी ही है।
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“मानक हिन्दी –
उत्तर प्रदेश की भाषा मुख्यतः हिन्दी है परन्तु स्थानीय बोलियाँ कई हैं। एक कहावत है : ‘हर बारह कोस पर बोली बदल जाती है।’ इस प्रकार तो इस प्रदेश की उपभाषाएँ ही असंख्य हो जायेगी। परन्तु मान लीजिए कि इस प्रान्त को हम भाषा के आधार पर तीन भागों में बाँटते हैं पश्चिमी भाग, मध्य भाग और पूर्वी भाग। पश्चिमी भाग में कहते हैं : ‘हम नहीं जायेंगे’, मध्य भाग में कहेंगे: ‘हम नाही जइहैं। और पूर्वी भाग वाले कहते हैं : ‘हम नाहीं जाइब।’ ये तीनों स्थानीय बोलियाँ अलग हैं, किन्तु भाषा तीनों की हिन्दी ही है।
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| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Dr. Brijmohan (डॉ. ब्रजमोहन ) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 168 |
| Year/Edtion | 2014 |
| Subject | Linguistics |
| Contents | N/A |
| About Athor | "डॉ. ब्रजमोहन – " |
















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