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Yahan Se Wahan (यहाँ से वहाँ)
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“सभी लेखक यायावर होते हैं हालाँकि वे प्रायः इसे स्वीकार नहीं करते । पाठक भी लेखकों के साथ एक तरह की ख़ानाबदोशी करते रहते हैं। अकसर उन्हें इसकी ख़बर नहीं होती। हम सभी ‘यहाँ’ से ‘वहाँ’ जाते रहते हैं, या उसकी कोशिश में लगे रहते हैं। हरेक का ‘यहाँ’ कुछ अलग होता है, कुछ समान : इसी तरह हरेक का ‘वहाँ’ भी कुछ अलग होता है, कुछ समान । मनुष्य होने का सुख और विडम्बना दोनों ही इस ‘यहाँ’ से ‘वहाँ’ में निहित हैं।
हर यात्रा भौतिक नहीं होती। हम बैठे-बैठे भी यहाँ से वहाँ जा सकते हैं या पहुँच जाते हैं। इस आवाजाही का माध्यम कोई उपकरण या वाहन उतना नहीं होता जितना, मनुष्य का सम्भवतः सब से क्रान्तिकारी आविष्कार, भाषा । हम जो भी कर रहे हों, भाषा से जूझ रहे हों या कि उससे खेल रहे हों या कि उसमें अन्तर्भुक्त मौन को सुनने-पकड़ने का अभिशप्त यत्न कर रहे हों, भाषा हमें यहाँ से वहाँ ले जा रही होती है। एक स्तर पर भाषा में सब कुछ सम्भव है : दूसरे स्तर पर बहुत कुछ है जो भाषा में असम्भव है। सम्भव से असम्भव की यात्रा भी, एक गहरे अर्थ में, यहाँ से वहाँ जाना है।
यह संचयन एक तरह से एक लेखक की ऐसी ही अटपटी यात्रा की लॉगबुक जैसी है पर ऐसी जो अकसर यात्रा के कई दिनों बाद, यानी यथा समय नहीं, लिखी गयी है। उसमें स्मृतियाँ, संस्मरण, तात्कालिक प्रतिक्रियाएँ, जब-तब उभरे विचार, मेल-मुलाकात आदि सभी अंकित होते रहे हैं।…..
(‘भूमिका’ से)”
| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Ashok Vajpeyi (अशोक वाजपेयी) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 408 |
| Year/Edtion | 2011 |
| Subject | Collection of Prose |
| Contents | N/A |
| About Athor | "अशोक वाजपेयी हिन्दी कवि-आलोचक, अनुवादक, सम्पादक तथा भारत की एक बड़ी सांस्कृतिक उपस्थिति हैं । कविता की 13 पुस्तकों, आलोचना की 7 पुस्तकों और अंग्रेजी में कला पर 3 पुस्तकों सहित उन्हें संस्कृति के विशिष्ट प्रसारक और नवोन्मेषी संस्था निर्माता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने भारतीय और विदेशी संस्कृतियों के मध्य परस्पर जागरूकता और आपसी संवाद को बढ़ाने के लिए अथक प्रयास किया है। कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं के सम्पादक के रूप में उन्होंने कविता और आलोचना में युवा प्रतिभाओं और समकालीन तथा शास्त्रीय कलाओं की आलोचनात्मक जागरूकता का प्रसार करने के लिए अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। वे साहित्य, संगीत, नृत्य, नाटक, दृश्यकलाओं, लोक एवं जनजातीय कलाओं, सिनेमा आदि से सम्बन्धित हजारों कार्यक्रमों के आयोजक रहे हैं। उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार, दयावती कवि शेखर सम्मान, भारत भारती और कबीर सम्मान प्रदान किये गये हैं। उनके काव्य संकलनों के अनुवाद अंग्रेजी, फ्रांसीसी, पोलिश, उर्दू, बांग्ला, गुजराती, मराठी और राजस्थानी में हुए हैं। भारत के एक विशिष्ट बुद्धिजीवी श्री वाजपेयी एक सृजनात्मक विश्व पर्यटक हैं, जिन्होंने सम्मेलनों में भाग लेने, व्याख्यान देने के क्रम में कई बार यूरोप आदि का भ्रमण किया है। उन्होंने पोलैण्ड के चार प्रमुख कवियों चेस्लाव मीलोष, वीस्वावा षिम्बोस्क, ज्वीग्न्येव हेर्बेर्त और तादेऊष रूज़ेविच की कृतियों का हिन्दी अनुवाद किया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा से निवृत्त होने के बाद वह दिल्ली में रह रहे हैं। उन्हें पोलैण्ड गणराज्य के राष्ट्रपति द्वारा और फ्रांसीसी सरकार द्वारा अपने उच्च सिविल सम्मानों से विभूषित किया गया है। वे इन दिनों केन्द्रीय ललित कला अकादेमी के अध्यक्ष हैं।" |















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