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Vaishvik Gaon-Pravasi Paon : Ek Maya? (वैश्विक गाँव-प्रवासी पाँव : एक माया?)

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Original price was: ₹595.00.Current price is: ₹387.00.

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“पचास वर्ष के आसपास की उम्र के लेखक हिन्दी में ‘युवा लेखक’ समझे जाते हैं। प्रवासी हिन्दी एवं विदेशी हिन्दी लेखकों की रचनाओं का यह जहाँ तक हमको मालूम है पहला संकलन है जिसमें कहानियाँ और कथेतर दोनों को समाहित किया गया है। हिन्दी घर की बोली है, भारत की औपचारिक भाषा और अब विश्वभाषा भी बनने की उम्मीद है। महत्त्वपूर्ण है कि नयी पीढ़ी समझती है कि हिन्दी हमारी है और न सिर्फ़ विरासत की भाषा है। तब ही ये नयी आवाज़ें हिन्दी की मशाल को जलाये रखेंगी। हिन्दी साहित्य विश्व-साहित्य पर एक महत्त्वपूर्ण योगदान है ख़ासकर जब से प्रवासी अनुभव और नयी पीढ़ी के अनुभवों की गूँज इसमें उभरकर आ रही है। हाँ, हिन्दी के साथ हीनता की भावना का मसला है पर वह तब तक चलता रहेगा जब तक हिन्दी विरासत और आधुनिकता दोनों का माध्यम बनती रहेगी। प्रवासी युवा दो संस्कृतियों, दो परम्पराओं और दो से अधिक भाषाओं के बीच अपनी पहचान को परिभाषित करने का प्रयास कर रहे हैं। यह संग्रह उनके संघर्षों, उपलब्धियों और भावनाओं का एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करता है; यह उनके मानसिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संघर्षों का दस्तावेज़ है। इसके अलावा इस जिल्द में सम्मिलित रचनाएँ प्रवासी समाज की पहचान की ज़रूरतों से आगे बढ़कर ग़ैर-प्रवासी हिन्दी का परिप्रेक्ष्य भी दिखाती हैं। समकालीन वैश्विक हिन्दी आजकल न सिर्फ प्रवासी समाज की है बल्कि सारे हिन्दी-प्रेमियों की है जिसमें ग़ैर-प्रवासी लेखन भी आ जाता है।

इस संग्रह की विशेषता यह भी है कि इसके लेखक विश्व के अलग-अलग देशों और परिवेशों से ही नहीं, अपितु अलग-अलग पेशों से भी आते हैं; उनके समृद्ध और विविध अनुभव इस कृति को अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य के लिए महत्त्वपूर्ण बनाते हैं। यही कारण है कि वैश्विक हिन्दी के लेखन के साथ सच्चे मायने में हिन्दी साहित्य का वैश्वीकरण हो रहा है।

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Edited by Divya Mathur, Dr. Sandhya Singh, Dr. Padmesh Gupta, Prof. Heinz Werner Wessler (सम्पादक : दिव्या माथुर, डॉ. संध्या सिंह, डॉ. पद्मेश गुप्त, प्रो. हाइंस वरनर वेस्लर )

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

172

Year/Edtion

2025

Subject

Fiction/Non-Fiction

Contents

N/A

About Athor

"दिव्या माथुर, एफ़.आर.एस.ए. वातायन-यूके की संस्थापकऔर रॉयल सोसाइटी ऑफ़ आर्ट्स की फेलो, बहु-पुरस्कृत लेखिका व सम्पादक हैं। उन्हें 'पद्मभूषण डॉ. मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार', 'वनमाली कथा सम्मान', आर्ट्स काउंसिल ऑफ़ इंग्लैंड का 'आर्ट्स अचीवर', और हाल ही में नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर एवं विश्व हिन्दी सचिवालय में मॉरीशस के प्रधान मन्त्री द्वारा सम्मान मिला है। उन्होंने सात कहानी-संग्रह, आठ कविता-संग्रह, दो उपन्यास तिलिस्म, शाम भर बातें, बाल उपन्यास बिन्नी बुआ का बिल्ला और सात सम्पादित संग्रह प्रकाशित किये हैं। उनकी रचनाओं पर 25 शोध हुए हैं। दिव्या जी ने नेहरू केन्द्र-लन्दन में वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्य किया और कई साहित्यिक मंचों पर सम्मानित हुईं। उनकी कहानी 'साँप सीढ़ी' पर दूरदर्शन ने टेलीफ़िल्म बनायी है।

★★★

डॉ. संध्या सिंह, वाराणसी में जन्मीं और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से पीएचडी प्राप्त, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर में हिन्दी और तमिल विभाग की प्रमुख हैं। वे संगम सिंगापुर की अध्यक्ष और पत्रिका सिंगापुर संगम की सम्पादक हैं। हिन्दी पाठ्यक्रम निर्माण, मन्त्रालयों के साथ भाषा-कार्य, और सांस्कृतिक आयोजनों में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान है। उनके प्रमुख प्रकाशन एन इंट्रोडक्शन टू हिन्दी (एलीमेंट्री और एडवांस) और सिंगापुर में भारत हैं। उनके तीन सम्पादित संग्रह सिंगापुर की चयनित रचनाएँ, सिंहापुरा-द्वीप देश की प्रवासी कविता और प्रवासी गद्य हैं। उन्हें 'विश्व हिन्दी सम्मान' (2023), 'प्रवासी साहित्य सम्मान', 'हिन्दी गौरव सम्मान' और 'हिन्दी शिक्षण सम्मान' सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले हैं।

★★★

डॉ. पद्येश गुप्त का जन्म 5 जनवरी 1965 को लखनऊ के समाजसेवी एवं प्रतिष्ठित परिवार में हुआ।
आप सन् 2000 में उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा विदेशों में हिन्दी प्रचार के लिए सम्मानित किये गये। 2007 में न्यूयॉर्क में हुए आठवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में 'विश्व हिन्दी सम्मान' और 2017 में भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी द्वारा भारत सरकार के 'पद्मभूषण डॉ. मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार' से सम्मानित किये गये।
आपके तीन काव्य-संग्रह-आकृति, सागर का पंछी एवं प्रवासी पुत्र तथा यू.के. के हिन्दी कवियों का संग्रह दूर बाग़ में सोंधी मिट्टी प्रकाशित हो चुके हैं।

आप 2004 से ऑक्सफ़ोर्ड में ऑक्सफ़ोर्ड बिज़नेस कॉलेज के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।

★★★

हाइंस वरनर वेस्लर, प्रोफ़ेसर (इंडोलॉजी), उप्साला विश्वविद्यालय, स्वीडन । मास्टर बॉन विश्वविद्यालय (जर्मनी), पीएचडी ज़ूरीश विश्वविद्यालय (स्विट्ज़रलैंड), पोस्टडॉक बॉन विश्वविद्यालय और आरहुस विश्वविद्यालय (डेनमार्क)। केन्द्रीय हिन्दी संस्थान में एडवांस्ड डिप्लोमा । हिन्दी, उर्दू, पंजाबी और संस्कृत भाषा और साहित्य में एवं संस्कृति और धर्म के इतिहास में अध्ययन-अध्यापन । यूरोपियन एसोसिएशन ऑफ़ साउथ एशियन स्टडीज़ के कौंसिल मेंबर। अध्यापन और अनुसन्धान के क्षेत्र : हिन्दी भाषा और साहित्य, उर्दू और संस्कृत, दक्षिण एशिया का सांस्कृतिक इतिहास, भारतीय दर्शन और धर्म का इतिहास, तुलनात्मक साहित्यशास्त्र। अनुवाद : कुँवर नारायण, हबीब तनवीर, उदय प्रकाश, मृणाल पाण्डे, प्रेमचन्द, कृश्न चन्दर, बेदी, अजय नावरिया इत्यादि।
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