“त्रिलोचन का कवि कर्म –
त्रिलोचन का कवि कर्म एक सक्रिय दर्शन का पाठ है। जब ‘तारसप्तक’ की इतिहास में तैयारी की जा रही थी, कवि त्रिलोचन अवध के गाँव से राजस्थान तक लोक कला की खोज कर रहा था। धरती और सप्तक की परम्पराओं में इसी नाते कई विरोधी कवि थे पर त्रिलोचन जनतन्त्र के कवि बाल्ट हिटमन से अमिषा के आदि कवि वाल्मीकि से संवाद कर रहा था। उसके संस्कार सक्रिय दर्शन के संस्कार थे।
विष्णुचन्द्र शर्मा ने 1950 में काशी में तुलसीदास के ‘स्थान’ की खोज की थी उसी समय लेखक ने देखा था ‘त्रिलोचन का अपनापन’। फिर दोनों काशी के घाट में घुमते हुए अपने दौर के कवियों पर, उनके प्रेम और सौन्दर्य की मान्यताओं पर बहस करने लगे थे।
आज जब त्रिलोचन नहीं हैं तो कविता के दो फाँक साफ़-साफ़ नजर आ रहे हैं एक ओर हैं- निराला से त्रिलोचन तक के सक्रिय दर्शन के कवि दूसरी ओर है पश्चिम से उधार ली हुई निष्क्रिय दर्शन की कविता। त्रिलोचन की पहचान शमशेर, मुक्तिबोध ने सक्रिय दर्शन के कवि के रूप में, तब की थी जब हिन्दी पर पश्चिम की ‘आधुनिकता’ का दबदबा था। जनपद या पक्षधर कवि नागार्जुन, त्रिलोचन, केदारनाथ अग्रवाल और मुक्तिबोध को उस दबदबे में भुला दिया गया था। केदारनाथ अग्रवाल ने तभी लिखा था क्रान्ति मेरी जीवनी है। प्रगतिशील कविता की यही कहानी त्रिलोचन की जनता की कहानी है जिसे उसने ‘पर्वत की दुहिता’ कहा था। महाकुम्भ में है आदिकवि से राम की शक्ति तक की परम्परा उसी परम्परा का लघुतम महाकाव्य है महाकुम्भ यहाँ है सक्रिय दर्शन के कवि त्रिलोचन का एक बिम्ब इस सक्रिय दर्शन का सूत्र है किसी देश या राष्ट्र की कभी नहीं जनता मरती है।
विष्णुचन्द्र शर्मा ने किंवदती पुरुष कहे जाने वालों से यहाँ प्रश्न पूछा है इस पुस्तक में त्रिलोचन के बाद की विडम्बना पर बहस की है। युद्धकाण्ड के महाकवि वाल्मीकि के साथ त्रिलोचन ने अभिधाशैली को पहचाना है। उनके प्रगतिशील द्वन्द्ववाद पर आत्मीय स्तर पर विचार किया है। आत्मीय स्तर पर है यहाँ संस्मरण, पत्र और राजत्व से किसानी तक की कहानी।
स्व. शिवचन्द्र शर्मा ने ‘स्थापना’ के तीन खण्ड त्रिलोचन पर निकाल कर इस कहानी की शुरुआत की थी। शमशेर ने ‘वेल’ कविता लिखकर अपने प्रिवकवि की क्लासिक परम्परा को विकसित किया था। विष्णुचन्द्र शर्मा ने कवि (1957) में त्रिलोचन की श्रेष्ठता पर बहस आयोजित की थी। त्रिलोचन का कवि कर्म इसी नाते आज की कविता की कसौटी है।
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| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Vishnuchandra Sharma (विष्णुचन्द्र शर्मा) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 162 |
| Year/Edtion | 2010 |
| Subject | Criticism |
| Contents | N/A |
| About Athor | " |














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