“रवीन्द्र कालिया के यहाँ विट और ह्यूमर का सानुपातिक प्रयोग मिलता है। अपनी कथाओं के बहुत गम्भीर स्थलों पर भी वे विट का साथ नहीं छोड़ते। ‘ तेरा क्या होगा कालिया’ चूँकि व्यंग्यों का संकलन है, यहाँ विट और चुहल बाईप्रोडक्ट की तरह न होकर केन्द्र में है। सन् अस्सी के दौर में साप्ताहिक ‘दिनमान’ के अन्तिम पृष्ठ पर ‘इतिश्री’ स्तम्भ के अन्तर्गत ये व्यंग्य शाया हुए और बहुत वर्षों बाद यहाँ एकत्र हैं। मज़ाक- मज़ाक में शुरू हुआ यह लेखन (देखें भूमिका) उत्तरोत्तर गम्भीर और दस्तावेजी स्वरूप धारण करता गया। साठ के दशक के लेखन में भारतीय राजनीतिक-सामाजिक परिदृश्य को देखते हुए साहित्य में जिस असन्तोष और मोहभंग का स्वर आना शुरू हुआ, वह अस्सी तक आते-आते दिशाहारा की स्थिति प्राप्त कर लेता है। राजनीतिक घपले, भ्रष्टाचार का बोलबाला, लाल फीताशाही, घोटाले, प्रपंच, झूठ और नेतृत्वहीनता की स्थिति को हम इन व्यंग्यों के सहारे बखूबी पकड़ सकते हैं। ये व्यंग्य सिर्फ राजनैतिक अथवा साहित्यिक नहीं, एक सजग रचनाकार द्वारा अपने समय व समाज की सम्यक और सन्तुलित पड़ताल हैं। इस दृष्टि से यह पुस्तक अपने समय का महत्त्वपूर्ण दस्तावेज है।
– कुणाल सिंह”
| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Ravindra Kalia (रवीन्द्र कालिया) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 292 |
| Year/Edtion | 2012 |
| Subject | Satire |
| Contents | N/A |
| About Athor | "रवीन्द्र कालिया जन्म : 1 अप्रैल, 1939 हिन्दी साहित्य में एम. ए. । प्रख्यात कथाकार, संस्मरण लेखक और यशस्वी सम्पादक । प्रमुख कृतियाँ: 'नौ साल छोटी पत्नी', 'ग़रीबी हटाओ', 'चकैया नीम', 'ज़रा-सी रोशनी', 'गली 'कूचे', 'रवीन्द्र कालिया की कहानियाँ' (कहानी- संग्रह); 'ख़ुदा सही सलामत है', 'ए.बी.सी.डी. ', * 17 रानडे रोड' (उपन्यास); 'ग़ालिब छुटी शराब' (संस्मरण) । उल्लेखनीय सम्पादित पुस्तकें : 'मेरी प्रिय सम्पादित कहानियाँ', 'मोहन राकेश की श्रेष्ठ कहानियाँ' और 'अमरकान्त'। देश-विदेश में अनेक संकलनों में रचनाएँ सम्मिलित विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में उपन्यास व कहानी शामिल। कई महाविद्यालयों में हिन्दी प्रवक्ता के रूप में कार्य। भारत सरकार द्वारा प्रकाशित 'भाषा' का सह-सम्पादन । 'धर्मयुग' में वरिष्ठ उप सम्पादक । अन्य सम्पादित पत्रिकाएँ : 'वर्तमान साहित्य' (कहानी महाविशेषांक), 'वर्ष अमरकान्त', 'साप्ताहिक गंगा यमुना' और 'वागर्थ ' । अन्तरराष्ट्रीय साहित्यिक कार्यक्रमों के सन्दर्भ में अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, जापान, नीदरलैंड, सूरीनाम व अन्य लातिन अमेरिकी देशों की यात्रा। सम्प्रति : निदेशक भारतीय ज्ञानपीठ एवं सम्पादक 'नया ज्ञानोदय'।" |
















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