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Suman Aur Sana (सुमन और सना )

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“सुमन और सना –
साम्प्रदायिक नफ़रत की वजह से होने वाले दंगे हमारे देश में कोई नयी बात नहीं। इन दंगों की वजह से मिले मानसिक आघात के नियमितता के कारण ही शायद हमारा समाज सब मिलाकर धीरे-धीरे इन सब घटनाओं की तरफ़ से संवेदनहीन-सा होता जा रहा है। ‘सुमन और सना’ एक कोशिश है इस मुद्दे से जुड़े इन्सानियत की तड़प और तकलीफ़ के पहल पर ध्यान केन्द्रित करने की। नाटक दंगे के शिकार उन लोगों के बारे में है, जिन पर आक्रमण हुआ और जिन लोगों को अपने घरों को छोड़कर भागना पड़ा। यह बिना किसी राजनीतिक उचितता और अनुचितता से सम्बद्ध हुए तकलीफ़ों को जीवन्त करता है।
इस नाटक में, जो एक कोलाज की तरह लिखा गया है, दंगे में मारे गये लोगों की शरणार्थी शिविर की ज़िन्दगी की झलकियाँ प्रस्तुत की गयी हैं। ये कहानी है उन लोगों के प्रयत्न की जो अपनी चोट और तकलीफ़ों को भुलाकर अपनी आज की परिस्थितियों के साथ समझौता करने की कोशिश में जुटे हैं।
कहानी समय और अन्तराल को पार कर एक निःसहाय छोटी लड़की, जिसका नाम सुमन और सना है के आँखों देखी वृत्तान्त के रूप में पेश की गयी है। उसकी आँखों के रास्ते हम देखते हैं कि कैसे एक आदमी दूसरे आदमी की वजह से अपमान आशंका और जोख़िम से गुज़रता है, एक अनर्थ जिसे बशीर बद्र ने बहुत मर्मस्पर्मी शब्दों में पेश किया है “”लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में””।

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Nadira Zaheer Babbar (नादिरा ज़हीर बब्बर )

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

62

Year/Edtion

2008

Subject

Play

Contents

N/A

About Athor

"नादिरा ज़हीर बब्बर –
रंगमंच सिनेमा और टेलीविज़न की मशहूर कलाकार नादिरा ज़हीर बब्बर भारतीय कलाजगत में अपने कलाकर्म और सामाजिक सक्रियता के कारण जानी जाती हैं। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की स्नातक और 'संगीत नाटक अकादमी', 'यश भारती', 'महिला शिरोमणि' पुरस्कारों से सम्मानित नादिरा ने अपनी संस्था 'एकजुट' के माध्यम से रंगमंच के क्षेत्र में कई नये प्रतिमान क़ायम किये हैं।
'ऑथेलो', 'तुग़लक', 'जसमा ओढ़न', 'सन्ध्या छाया', 'बेगम जान' आदि नाटकों में केन्द्रीय भूमिकाएँ निभाने के अलावा उन्होंने और ऐसे कई नाटकों का निर्देशन किया है जो भारतीय रंगमंच में अपनी नयी पहल-क़दमी के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। सुप्रसिद्ध चित्रकार मक़बूल फ़िदा हुसैन के जीवन पर आधारित 'पेंसिल से ब्रश तक', धर्मवीर भारती की कालजयी कृतियों 'कनुप्रिया' एवं 'अन्धा युग' पर आधारित 'इतिहास तुम्हें ले गया कन्हैया' और उत्तर पूर्व की पृष्ठभूमि पर 'ऑपरेशन क्लाउडबर्स्ट' सहित उन्होंने दर्जनों ऐसे नाटकों का निर्देशन किया है जो भारतीय रंगमंच में ऐसा कुछ नया जोड़ते हैं जिससे नयी पीढ़ी प्रभावित हो सकती है।
प्रगतिशील लेखक संघ के संस्थापक कॉमरेड सज्जाद जहीर की बेटी और मशहूर नेता-अभिनेता राज बब्बर की पत्नी नादिरा का जन्म 20 जनवरी, 1948 को हुआ था। इन दिनों वे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय सोसायटी की सम्मानित सदस्य हैं।
"

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