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Pyaaree Anna (प्यारी अन्ना)

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“प्यारी ऑन्ना –
प्रस्तुत उपन्यास बेला कुन के पलायन से आरम्भ होता है, और रोमानियन फ़ौजों का देश में आगमन दिखाता है। उपन्यास का अन्त ट्रायनॉन सन्धि से थोड़ा ही पहले होता है जब कोस्तोलान्यी दैश्ज़ो का स्वयं का जन्म स्थान भी युगोस्लाविया के पास चला गया था। परन्तु उपन्यास इन सब राजनीतिक घटनाओं के बारे में नहीं है : ऐतिहासिक परिस्थितियों का ज़िक्र अवश्य है पर कहानी, समाज के बारे में है, सामाजिक विडम्बनाओं के बारे में है। एडमिरल होर्थी का बड़े बैण्ड बाजे के साथ बुदापैश्त में आने का केवल दृश्य मात्र है, होर्थी जो द्वितीय विश्व युद्ध के अन्त के हंगरी की बागडोर सँभाले था और जिसने ‘लाल आतंक’ के जवाब में ‘सफ़ेद आतंक’ को जन्म दिया था; उसके काल के बारे में बस छू भर दिया गया है। बस इन सब हालातों के कारण लोगों की जो मनःस्थिति हो गयी थी, जो ख़ालीपन और वहशीपन उनमें आ गया था, उसकी झलक ज़रूर हमें उपन्यास में देती है।

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Kosztolanyi Dezso Translated By Indu Mazaldan (कोस्तोलान्यी दैश्ज़ो, अनुवाद – इन्दु मज़लदान)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

204

Year/Edtion

2011

Subject

Novel

Contents

N/A

About Athor

"कोस्तोलान्यी दैश्जो –
जन्म : गार्च 1885 में सावादका नामक शहर में हुआ था। आपके पिता कोणाची आरसाद, हाईस्कूल में गणित और फिजिक्स के टीचर के बाद में नहीं प्रिंसिपल भी बने। अपनी युवावस्था में उनका नाम भी साहित्य से जुड़ा था। बाल्यकाल में अक्सर बीमार रहने वाले देश्को पर सबसे अधिक प्रभाव उनके दादा का पड़ा। अपना नाम भी उन्हें दादा से ही मिला जो अंक हीरो डेसिडरियस का संक्षिप्त रूप था। पढ़ना, लिखना और 1848-19 के स्वाधीनता संग्राम की कहानियों देशों ने उन्हीं से साखीं।

कोस्तोलान्ची ने अपनी प्राथमिक और हाई स्कूल की पढ़ाई अपने जन्म स्थान पर ही पूरी की। बहुत अच्छे विद्यार्थी की तरह सदा अव्वल रहकर, सोलह वर्ष के थे जब बुदापेश्त नोपलों में आपकी पहली कविता छपी। 1903 में बुदापेश्त में हंगारी-जर्मन विभाग में दाख़िला लिया और पहले वर्ष के बाद ही वियना पढ़ने चले गये। कुछ ही महीनों में वहाँ से दिल भर गया, सौर्वादका लौट आये और वहाँ के एक अख़बार 'बाँचकोई समाचार' में नौकरी कर ली।

सन् 1408 में हंगारी की विख्यात 'च्यूगौत' पत्रिका से जुड़ गये। 1910 में एक ग़रीब बच्चे की शिकायतें प्रकाशित हुई जिसको इतनी अधिक सफलता मिली कि 1993 तक इसके छह संस्करण प्रकाशित हो चुके थे। इनकी प्रमुख कृतियों में 1911 में 'ताश', 1912 में 'मांगिया', 1913 में 'चेन, चैन, एस्तैर की चेन', 1914 में 'चिराग़', 1915 में 'मेरा छोटा भाई', 1916 में 'स्याही' और 'आकर्षक लोग', 1918 में 'केन', 1919 में 'मोर'। 1921 में 'बेकार डॉक्टर', 1922 में 'नीरो, एक ख़ूनी कवि, 1924 में 'चकोरी', 1925 में 'सोने की पतंग' और 1926 में 'प्यारी' ऑन्ना'।
तीन नवम्बर 1936 में आपका देहावसान हो गया।

अनुवादक – इन्दु मज़लदान –
सम्प्रति : दिल्ली विश्वविद्यालय के माता सुन्दरी कॉलेज में अंग्रेज़ी विभाग में रीडर है। 1992 से आप हंगारी भाषा के पठन-पाठन से जुड़ी हुई हैं। बुदापैश्त जाकर हंगारी भाषा और साहित्य का अध्ययन कर आने के बाद आप हंगारी साहित्य का हिन्दी में अनुवाद कर रही हैं। इनकी सात पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- 'प्रेम राग' (हंगारी प्रेम कविता संकलन), 'वित्त-मन्त्री का नाश्ता' (हंगारी कहानी संग्रह), शान्दोर मारोई का उपन्यास, A gyertyák csonkig égnek का हिन्दी अनुवाद 'शमाएँ ख़ाक होने तक सुलगती हैं', पहली हंगारी महिला लेखिका का उपन्यास 'रंग एवं वर्ष', कोस्तोलान्यी दैश्जो का उपन्यास Pacsirta का हिन्दी अनुवाद 'चकोरी' व नोबेल पुरस्कार विजेता इमरे कैरतेस के उपन्यास Sorstalanság का हिन्दी अनुवाद 'नियतिहीनता' और माँगदाँ साँबो के उपन्यास Azajtó का हिन्दी अनुवाद 'दरवाज़ा'।

2010 में इन्दु मज़लदान को हंगरी के सर्वश्रेष्ठ सिविलियन ऑनर 'प्रो कुल्तुरा हुंगारिका' (PRO KULTURA HUNGARICA) से हंगारी सरकार ने अलंकृत किया है।
"

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