“प्रशासनिक हिन्दी : ऐतिहासिक सन्दर्भ –
हिन्दी भाषा के अध्येताओं और हिन्दी के प्रतिष्ठित तथा उदीयमान साहित्यकारों का प्रशासन में हुए हिन्दी के प्रयोग की ओर ध्यान दिलाना अत्यन्त आवश्यक कार्य है, क्योंकि हिन्दी के, इस दिशा में हुए प्रयोग का अध्ययन, न तो ‘प्रशासन’ विषय के अन्तर्गत, न ही इतिहास में किया जाता है और न ही साहित्य के महारथियों ने इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता समझी है।
इस पुस्तक में हिन्दी के प्रशासनिक कार्यों में सदियों से हुए प्रयोग की ओर इंगित करते हुए, भाषा के महत्व का प्रतिपादन किया गया है।
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“प्रशासनिक हिन्दी : ऐतिहासिक सन्दर्भ –
हिन्दी भाषा के अध्येताओं और हिन्दी के प्रतिष्ठित तथा उदीयमान साहित्यकारों का प्रशासन में हुए हिन्दी के प्रयोग की ओर ध्यान दिलाना अत्यन्त आवश्यक कार्य है, क्योंकि हिन्दी के, इस दिशा में हुए प्रयोग का अध्ययन, न तो ‘प्रशासन’ विषय के अन्तर्गत, न ही इतिहास में किया जाता है और न ही साहित्य के महारथियों ने इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता समझी है।
इस पुस्तक में हिन्दी के प्रशासनिक कार्यों में सदियों से हुए प्रयोग की ओर इंगित करते हुए, भाषा के महत्व का प्रतिपादन किया गया है।
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| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Dr. Mahesh Chandra Gupta (डॉ. महेश चन्द्र गुप्त) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 288 |
| Year/Edtion | 2011 |
| Subject | Linguistics |
| Contents | N/A |
| About Athor | "डॉ. महेशचन्द्र गुप्त – " |
















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