“पाँच बेहतरीन कहानियाँ –
“पंकज अब रात-बिरात उसके पीछे-पीछे नहीं घूमता। उसके काम निपटने का वह दस बजे तक इन्तज़ार करता, ग्यारह बजे तक करता, फिर खीझकर सो जाता। ऐलर्जी, गैस, कमरदर्द जैसी छिटपुट ज़िद्दी बीमारियों के साथ उलझती शोभा किसी तरह रात बिताती। ताज्जुब था कि ये बीमारियाँ रात में आतीं, दबे पाँव, और दिन में उसे छोड़ जातीं। वह यन्त्र की तरह फिर अपने कामों में लग जाती। …वह अपनी समस्त प्रतिभा मटर-पनीर में झोंककर, सहनशक्ति का सलाद और रचनात्मकता का रायता परोस स्वयं को धन्य मानती।””
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“पाँच बेहतरीन कहानियाँ –
“पंकज अब रात-बिरात उसके पीछे-पीछे नहीं घूमता। उसके काम निपटने का वह दस बजे तक इन्तज़ार करता, ग्यारह बजे तक करता, फिर खीझकर सो जाता। ऐलर्जी, गैस, कमरदर्द जैसी छिटपुट ज़िद्दी बीमारियों के साथ उलझती शोभा किसी तरह रात बिताती। ताज्जुब था कि ये बीमारियाँ रात में आतीं, दबे पाँव, और दिन में उसे छोड़ जातीं। वह यन्त्र की तरह फिर अपने कामों में लग जाती। …वह अपनी समस्त प्रतिभा मटर-पनीर में झोंककर, सहनशक्ति का सलाद और रचनात्मकता का रायता परोस स्वयं को धन्य मानती।””
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| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Mamta Kalia (ममता कालिया) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 66 |
| Year/Edtion | 2013 |
| Subject | Collection of Short Stories |
| Contents | N/A |
| About Athor | "ममता कालिया – विषय: कहानी, नाटक, उपन्यास, निबन्ध, कविता और पत्रकारिता। |
















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