“पाँच बेहतरीन कहानियाँ –
“’बैंक खाते में भले धन का अभाव रहता हो मेरे ईमेल खाते में इस तरह से आभासी रूप में करोड़ों रुपए जमा होते जा रहे हैं। मेरे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है… पत्नी सलाह देती रहती है कि ईमेल का कनेक्शन कटवा दीजिए नहीं तो किसी दिन किसी चाल में फँस जाइएगा… तुम ही कुछ सलाह दो… क्या करना चाहिए?’ मैं सलाह क्या देता मुझे तो सुबिमल मास्टर की कहानी याद आने लगी है…..””
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“पाँच बेहतरीन कहानियाँ –
“’बैंक खाते में भले धन का अभाव रहता हो मेरे ईमेल खाते में इस तरह से आभासी रूप में करोड़ों रुपए जमा होते जा रहे हैं। मेरे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है… पत्नी सलाह देती रहती है कि ईमेल का कनेक्शन कटवा दीजिए नहीं तो किसी दिन किसी चाल में फँस जाइएगा… तुम ही कुछ सलाह दो… क्या करना चाहिए?’ मैं सलाह क्या देता मुझे तो सुबिमल मास्टर की कहानी याद आने लगी है…..””
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| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Prabhat Ranjan (प्रभात रंजन) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 76 |
| Year/Edtion | 2013 |
| Subject | Collection of Short Stories |
| Contents | N/A |
| About Athor | "प्रभात रंजन – |
















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