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Karbala (कर्बला)

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कर्बला प्रेमचंद द्वारा लिखित नाटकों में प्रमुख माना जाता है। हिन्दू समाज के इतिहास में रामायण और महाभारत कथाओं का जो माहात्म्य है, मुस्लिम समाज के इतिहास में कर्बला के संग्राम को वही स्थान प्राप्त है। यह दुखांत नाटक हुसैन की शहादत पर आधारित है और हजरत साहब की मृत्यु के बाद की संघर्षपूर्ण स्थिति का प्रभावशाली चित्रण करता है।

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Premchand (प्रेमचंद)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

200

Year/Edtion

2024

Subject

Play

Contents

N/A

About Athor

"प्रेमचंद (31 जुलाई 1880-8 अक्टूबर 1936) हिन्दी के सबसे बड़े और सबसे ज्यादा लोकप्रिय कथाकार हैं। उनका मूल नाम धनपत राय था। उन्होंने लेखन की शुरुआत उर्दू से की। प्रेमचंद की पहली पुस्तक 'सोज़े वतन' जो देशभक्ति की पाँच कहानियों का संग्रह है, अंग्रेज शासकों द्वारा जब्त कर ली गई थी। उसके बाद वे हिन्दी में लिखने लगे। उन्होंने कुल 15 उपन्यास, 300 से कुछ अधिक कहानियाँ, तीन नाटक, दस अनुवाद, बाल साहित्य की सात पुस्तकें और हजारों पृष्ठों के लेख, संपादकीय, भूमिका आदि की रचना की। उनके जीवन काल में ही उन्हें 'उपन्यास सम्राट' माना गया। प्रेमचंद की ख्याति मुख्य रूप से उनके कथा साहित्य पर आधारित है।
प्रेमचंद ने हिंदी उपन्यास और कहानी को परिपक्वता दी। भारतीय समाज का दुख-दर्द और सामान्य लोगों का जीवन उनके लेखन में पहली बार इतनी विविधता और बारीकी से अभिव्यक्त हुआ। प्रेमचंद की कालजयी कृति 'गोदान' को भारत के किसान जीवन का महाकाव्य माना जाता है। 'रंगभूमि' पर गाँधीवाद का प्रभाव है। 'सेवासदन' और 'कर्मभूमि' सुधारवादी उपन्यास हैं। प्रेमचंद के विपुल कथा साहित्य में सांप्रदायिकता, भ्रष्टाचार, जमींदारी, कर्जखोरी, गरीबी, राजनीतिक पराधीनता आदि का प्रभावशाली चित्रण मिलता है।
प्रेमचंद प्रगतिशील विचारधारा के लेखक थे। अपनी बात लोगों तक पहुँचाने के लिए प्रेमचंद ने 'हंस' और 'जागरण' पत्रिकाओं का संपादन-प्रकाशन भी किया। प्रेमचंद के उपन्यासों और कहानियों पर कई फिल्में बनाई गईं। समय के साथ-साथ प्रेमचंद की प्रासंगिकता बढ़ती जा रही है और कथाकारों की प्रत्येक पीढ़ी उन्हें अपना प्रेरणा-पुरुष मानती है।

"

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