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Jharna (झरना)

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“झरना –
झरना (काव्य संग्रह) के रचयिता जयशंकर प्रसाद हैं। यह पुस्तक छायावादी कविता की प्रारम्भिक पुस्तक है। छायावाद का प्रारम्भ झरना के प्रकाशन से ही माना जाता है। झरना का प्रकाशन १९१८ ई. में हुआ। इसमें अपेक्षाकृत कम कविताएँ थीं। आगामी संस्करणों में कुछ कविताएँ और रख दी गयीं तथा कुछ कविताओं को हटा दिया गया। झरना की कविताओं में कवि के आगामी विकास का आभास प्राप्त हो जाता है और इसी कारण समीक्षक इसे छायावाद युग का एक महत्त्वपूर्ण सोपान मानते हैं। झरना की अधिकांश कविताएँ १९१४-१९१७ ई० के बीच लिखी गयीं है। झरना कवि के यौवनकाल की रचना है और इसकी कविताओं से उसकी मनोदशा का बोध होता है। प्रकृति का मानवीय भावों के साथ एकीकरण भी इन कविताओं में देखा जा सकता है।

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Jaishankar Prasad (जयशंकर प्रसाद)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

88

Year/Edtion

2014

Subject

Poetry

Contents

N/A

About Athor

"जयशंकर प्रसाद –
जयशंकर प्रसाद हिन्दी कवि, नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार तथा निबन्ध-लेखक थे। वे हिन्दी के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तम्भों में से एक हैं। उन्होंने हिन्दी काव्य में एक तरह से छायावाद की स्थापना की जिसके द्वारा खड़ीबोली के काव्य में न केवल कमनीय माधुर्य की रससिद्ध धारा प्रवाहित हुई, बल्कि जीवन के सूक्ष्म एवं व्यापक आयामों के चित्रण की शक्ति भी संचित हुई और कामायनी तक पहुँचकर वह काव्य प्रेरक शक्तिकाव्य के रूप में भी प्रतिष्ठित हो गया। बाद के, प्रगतिशील एवं नयी कविता दोनों धाराओं के, प्रमुख आलोचकों ने उसकी इस शक्तिमत्ता को स्वीकृति दी। इसका एक अतिरिक्त प्रभाव यह भी हुआ कि 'खड़ीबोली' हिन्दी काव्य की निर्विवाद सिद्ध भाषा बन गयी।
"

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