100% Money back

Search

Need help? 9990860860 Nanhi Shop
Need help? 9990860860 Nanhi Shop

10 in stock

Jharkhand Encyclopedia (4 Volume Set ) (झारखण्ड एन्साइक्लोपीडिया (4 खण्डों में))

3,150.003,900.00

Clear
Compare

“झारखण्ड एन्साइक्लोपीडिया (4 खण्डों में) – भारतीय इतिहास की पुस्तकों में ‘झारखंड का इतिहास’ और इसके जननायक प्रायः अनुपस्थित हैं। ऐसा क्यों?
क्या सरलीकृत रूप में कहें तो भारत के इतिहास का सामान्य अर्थ इन्द्रप्रस्थ से लेकर पाटलिपुत्र तक का इतिहास मात्र ही है?
क्या तुर्क मुगलकाल के दरबारी लेखक, अंग्रेज़ इतिहासकार और आज़ादी के बाद के राष्ट्रवादी या प्रगतिवादी इतिहासकार सबके लिए सप्तसिन्धु का क्षेत्र एवं गंगा-यमुना-दोआब ही पवित्र आर्यभूमि आर्यावर्त, हिन्दुस्तान के लिए नहीं था?
कथित मुख्यधारा के भारतीय इतिहास में जब दक्षिण भारत के साथ ही सौतेलापन है तो झारखंड-कलिंग जैसे वन-प्रान्तर और सीमान्त क्षेत्रों को कौन पूछे?
किन्तु झारखंडी हुलगुलानों की प्रतिध्वनियाँ अब अनसुनी नहीं रहेंगी। ज्वलन्त ऐतिहासिक प्रश्नों का उत्तर तलाशता एन्साइक्लोपीडिया का यह खंड – छोटानागपुर का इतिहास, संतालपरगना का इतिहास, सरायकेला-खारसांवा का इतिहास, सदानों का इतिहास, 1857 और झारखंड, भारत छोड़ो आन्दोलन में झारखंड, हो परम्परा, टाना भगत आन्दोलन आदि… आदि।

★★★

बिर और बुरु यानी जंगल और पहाड़। झारखंड का नाम लेते ही प्रकृति के जो दो रूप आँखों के सामने झलकते हैं वे यही जंगल और पहाड़ हैं। झारखंडी जन, समुदाय और संस्कृति इन्हीं जंगलों-पहाड़ों में पलती-बढ़ती आज इस मुकाम तक आ पहुँची है। ये जंगल और पहाड़ इनके आराध्य भी हैं और पालनहार भी।
जंगल और पहाड़ों के साथ-साथ झारखंड के समस्त भौगोलिक विकास, परिस्थिति-परिवेश की चर्चा अपने विषय के विभिन्न विद्वान-विशेषज्ञों ने इस खंड में की है यथा- झारखंड की भौगोलिक संरचना, भू-आकृति, नदियाँ और उनकी प्रकृति, वन सम्पदा, भूजल और भू-विज्ञान, कोयला और अन्य खनिज, कृषि एवं सिंचाई, ऊर्जा, परिवहन, पथ के साथ-साथ, हाट-बाज़ार और पर्यटन केन्द्र आदि-आदि।

★★★

झारखंड सहित देश के अधिकांश आदिवासी बाहुल्य इलाक़ों ने विकास के पूँजीवादी अवधारणा से उत्पन्न दंश को झेला है। विस्थापन एवं पलायन विकास के उप-उत्पाद के रूप में सामने आये हैं।
नेहरू-वेरियर एल्विन के पंचशील सिद्धान्तों से प्रेरित होकर विकास के विभिन्न कार्यक्रम अपनाये गये उसके कारण सरकारी सेवाओं में कुछ प्रतिशत झारखंडी आबादी भी दिखने लगी है।
इस खंड में ऐसी ही श्वेत-श्याम तस्वीरें सजाई हैं, यथा- विकास रणनीति, स्वैच्छिक संस्थाओं की भूमिका, विस्थापन-पलायन-भूमि का अवैध हस्तान्तरण, भूख से सुरक्षा, छोटानागपुर एवं संतालपरगना की विशिष्ट भू-विधियाँ, शहरी गरीबी, कोयलकारो, नेतरहाट फायरिंग रेंज, जादूगोड़ा, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, झारखंड में सिनेमा का विकास, स्त्रियों के हालात और रोज़गार के अवसर, झारखंड की राजनीति और मज़दूर वर्ग का आन्दोलन, झारखंड का भविष्य, आदि-आदि।

★★★

झारखंड की अपनी विशिष्ट जनसंस्कृति है जो प्रकृति पर विजय नहीं बल्कि उसकी पूजा, उसके साथ सामंजस्य स्थापित करती, सामुदायिकता-सामूहिकता पर आधारित, श्रमरस में रची-बसी, उत्सवधर्मी है। जन या लोक अपने आनन्द में वैसा ही उत्फुल्ल होता है जैसे प्रकृति उत्फुल्ल रहती है। व्यक्ति समूह बनकर ही आनन्द का आस्वादन करता है। उत्पादन और आस्वादन दोनों का सम्बन्ध समूह से है। प्रकृति और व्यक्ति-चेतना का एकात्म-अंतःस्राव लोक-कलाओं में रसानुभूति का संचार करता है।
संस्कृति (सम्यक् कृति) मनुष्य की वह रचना है जिनमें मानव की सृजनात्मक शक्ति और योग्यता का चरम निहित है। यह खंड झारखंडी लोक-साहित्य, लोक-कला, संस्कृति आदि के विविधरंगी रूपों से सुपरिचित करवाने का एक विनम्र प्रयास है, यथा-संताली भाषा और साहित्य, कुडुरव भाषा और साहित्य, मुंडारी भाषा और साहित्य, खड़िया भाषा और साहित्य, हो भाषा और साहित्य, कुरमाली भाषा और साहित्य, अंगिका भाषा और साहित्य, खोरठा भाषा और साहित्य, पंचपरगनिया भाषा और साहित्य, नागपुरी भाषा और साहित्य, झारखंड में हिन्दी साहित्य, उर्दू साहित्य, बंगला और उड़िया साहित्य, आदिवासियों के सृष्टि मिथक एवं विश्व तत्व, आदिधर्म : भारतीय आदिवासियों की धार्मिक अवस्थाएँ, झारखंड के पर्व, नृत्य, वाद्ययन्त्र।

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Edited By Raneder, Sudhir Pal (सम्पादक – रणेंद्र, सुधीर पाल)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

1568

Year/Edtion

2019

Subject

Encyclopedia

Contents

N/A

About Athor

"रणेन्द्र –
मूलतः कवि, झारखंड की साहित्यिक पत्रिका 'कांची' का सम्पादन, कई हिन्दी दैनिकों में ‘साहित्यिकी’ परिशिष्ट का सम्पादन-संयोजन। 1988 से चेनारी (रोहतास) के दलितों, चेरो-खरवार, अनगड़ा (राँची) के बेदिया, मुंडा, बिरहोर एवं विशुनपुर (गुमला) के उराँव, खेरवार, असुर, बिरजिया के बीच जिज्ञासु विद्यार्थी की तरह सीखने की कोशिश। कथादेश कहानी पुरस्कार से सम्मानित। लोक जीवन से जुड़ी कविताओं और कहानियों को नये सन्दर्भ में पेश करने की विशिष्ट भाषा शैली के लिए चर्चित। आजीविका के लिए राज्य प्रशासनिक सेवा में।

★★★

सुधीर पाल –
पेशे से पत्रकार, उप-सम्पादक दैनिक राँची एक्सप्रेस, जनमुद्दों पर नियमित लेखन, पी.बी. एल. नज़र टेलीविज़न में अवैतनिक सम्पादकीय सलाहकार। सामाजिक सरोकारों की अभिव्यक्ति ‘संवाद मन्थन', फीचर सेवा का सम्पादन (अवैतनिक)। मीडिया के सामाजिक सरोकारों को लेकर कई अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार में भाग लिया। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और रेडियो माध्यमों में जनमुद्दों को लेकर व्यापक हस्तक्षेप। अपनी विशिष्ट लेखन और रिपोर्टिंग शैली के लिए पहचाने जाते हैं। अन्तर्राष्ट्रीय अख़बारों के लिए सलाहकार के तौर पर अनुबन्धित, "

Reviews

There are no reviews yet.

Write a review

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Bestsellers

Ravindra Nath Tagore Rachnawali - Do Bahan, (Part-50)

Original price was: ₹60.00.Current price is: ₹48.00.
(0 Reviews)

Ravindra Nath Tagore Rachnawali - Tash Ka Desh (Part-6)

Original price was: ₹60.00.Current price is: ₹48.00.
(0 Reviews)

Ve Din by Nirmal Verma

Original price was: ₹250.00.Current price is: ₹200.00.
(0 Reviews)

Maru Kesari (मरु-केसरी)

Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹130.00.
(0 Reviews)

Innovations in Horticultural Sciences

Original price was: ₹6,500.00.Current price is: ₹4,875.00.
(0 Reviews)

IPR: Drafting,Interpretation of Patent Specifications and Claims

Original price was: ₹2,995.00.Current price is: ₹2,246.00.
(0 Reviews)

Back to Top
Product has been added to your cart