“पहाड़ों पर होती भारी वर्षा और बरसते पानी के ठीक विपरीत साफ़ आकाश और पर्वतों पर तेज सूर्य के प्रकाश से उभरती छवियाँ – उपन्यास लेखन की अनेक विधाओं के साथ प्रयोग करता है। इन प्राकृतिक छवियों के भीतर रिपोर्ताज, डायरी और रेखाचित्र की विधाएँ संवाद की अद्भुत योग्यता के साथ नये आकार लेकर उभरती हैं। सशक्त महिला पात्रों की बहुमुखी विशिष्टता जो आधुनिकता और पारम्परिकता दोनों के प्रभावी मिश्रण की तस्वीर है, इस उपन्यास में उन स्वरों को यथार्थवादी धरातल पर उतारने में नयी ईमानदारी का परिचय देती है।
बदलते सामाजिक एवं आर्थिक सरोकारों के भीतर भाषा के विकसित होते मापदण्ड पात्रों के स्वरों में अभिव्यक्त हुए हैं। उत्तर-आधुनिकता की शब्दावली के स्तर पर ये प्रयोग भाषा की जटिलता के इतर उनके प्रति ईमानदारी का भाव जगाने का सार्थक प्रयास बनकर उभरे हैं।
हम कह सकते हैं कि सतत और प्रभावी कथानक से निर्मित पात्रों की मानवीय संवेदनाओं एवं जीवन के एकाकीपन की चुनौतियों का सामना करती प्रधान पात्र की यथास्थिति के प्रति जो सहज स्वीकृति का भाव अकल्पनीय है, उससे उपन्यास बेउसूल दुनिया की कमियों की पहचान करते हुए आगे बढ़ने का सशक्त सन्देश देता है। इसमें कोई सन्देह नहीं कि अंग्रेज़ी भाषा से अनूदित यह उपन्यास भारतीय सन्दर्भ के भीतर रची-बसी संस्कृति को हिन्दी पाठकों तक पहुँचाने में रचनाशीलता के कई स्तरों को प्रभावित करेगा।
अपने अछूते कथ्य और विरल आस्वाद के कारण यह एक बहुमूल्य कृति है ‘जाग तुझको
दूर जाना’।
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| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Namita Gokhale, Translated by Aishwarj Kumar (नमिता गोखले, अनुवाद : ऐश्वर्ज कुमार) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 128 |
| Year/Edtion | 2025 |
| Subject | Novel |
| Contents | N/A |
| About Athor | "नमिता गोखले लेखक, प्रकाशक, फ़ेस्टिवल डायरेक्टर तथा अठारह कथा – अकथा की किताबों की लेखिका हैं। उनका पहला उपन्यास पारो : ड्रीम्स ऑफ़ पैशन बहुत प्रसिद्ध उपन्यास है जिसका प्रकाशन 1984 में हुआ था और जिसकी प्रसिद्धि आज भी बरक़रार है; और उपन्यास के दूसरे खण्ड प्रिया के साथ इसका दूसरा संस्करण भी प्रकाशित किया गया था। नमिता गोखले ने अलग-अलग विधाओं में मिथकों के ऊपर ख़ूब काम किया है, जिनमें पफ़िन महाभारत में भारतीय मिथक महाकाव्य का पुनः प्रस्तुतीकरण भी शामिल है। हाल में प्रकाशित उनका उपन्यास थिंग्स टु लीव बिहाइंड फ़ॉरएवर, जो हिमालय त्रयी का हिस्सा है, को अनेक पुरस्कार मिले और आलोचकों की भरपूर प्रशंसा भी मिली। ★★★ ऐश्वर्ज कुमार कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के फ़ैकल्टी ऑफ़ एशियन एंड मिडिल ईस्टर्न स्टडीज़ में एसोसिएट प्रोफ़ेसर के पद पर कार्यरत हैं । यहाँ वे स्नात्तक छात्रों को हिन्दी भाषा एवं साहित्य पढ़ाते हैं। साथ ही, सेंटर ऑफ़ साउथ एशियन स्टडीज़ में एम. फिल. विद्यार्थियों को भाषा, साहित्य पढ़ाने से लेकर पर्यवेक्षक की भूमिका निभाते हैं। उत्तर भारतीय समाज, संस्कृति, रंगमंच और भाषाओं में रुचि रखते हैं और हिन्दी भाषा के सामाजिक इतिहास पर शोध-कार्य कर रहे हैं। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की 'मॉडर्न एशियन स्टडीज़' पत्रिका के अलावा पिछले कुछेक वर्षों में 'जनसत्ता', 'वाक्', 'स्वतन्त्र वार्त्ता', 'प्रतिमान' आदि पत्र-पत्रिकाओं में इनके शोध-लेख प्रकाशित हो चुके हैं। |














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