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Huye Mar Ke Hum Jo Ruswa (हुए मर के हम जो रुसवा)

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“हुए मर के हम जो रुसवा –
कविता में भी व्यंग्य लिखे अवश्य गये, किन्तु कवि इस विधा की स्वतन्त्रता के विषय में इतने गम्भीर दिखाई नहीं पड़े, जितने कि गद्य-लेखक। व्यंग्य कवियों की महत्वाकांक्षा कवि बनने की ही रही, गद्य में लिखने वाले व्यंग्यकारों की, व्यंग्यकार बनने की।

कुछ अतिरिक्त शास्त्रीय समीक्षक व्यंग्य को केवल एक ‘शब्दशक्ति’ के रूप में ही स्वीकार करते हैं। मुझे यह मानने में कोई आपत्ति नहीं है कि हिन्दी साहित्य के रीतिकाल तक, व्यंग्य या तो एक शब्दशक्ति था, या अन्योक्ति, वक्रोक्ति अथवा समासोक्ति जैसा अलंकार। किन्तु समय और परिस्थितियों के परिवर्तन के साथ विधाओं का विकास भी होता है, और नयी विधाओं का निर्माण भी। हम व्यंग्य को आज के सन्दर्भ में देखें तो पायेंगे कि आज के व्यंग्य-उपन्यासों, व्यंग्य-निबन्धों, व्यंग्य-कथाओं तथा व्यंग्य-नाटकों में व्यंग्य के शब्दशक्ति अथवा अलंकार मात्र नहीं हैं। उसका विकास हो चुका है और वह शास्त्रकार से माँग करता है कि वह व्यंग्य-विधा के लक्षणों का निर्माण करे।
किसी विधा को एक ही भाषा के सन्दर्भ में देखना भी उचित नहीं है। सम्भव है कि यह कहा जा सके कि अमुक भाषा में व्यंग्य नहीं है। किन्तु संसार की किसी भाषा में व्यंग्य अथवा ‘सैटायर’ स्वतन्त्र विधा ही नहीं है, और वह स्वतन्त्र विधा हो ही नहीं सकता, ऐसा कहना मुझे उचित नहीं जँचता।

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Narendra Kohli (नरेन्द्र कोहली)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

148

Year/Edtion

2015

Subject

Satire

Contents

N/A

About Athor

"नरेन्द्र कोहली –
जन्म: 6 जनवरी, 1940।
कालजयी कथाकार एवं मनीषी पद्मश्री अलंकृत डॉ. नरेन्द्र कोहली की गणना आधुनिक हिन्दी साहित्य के सर्वश्रेष्ठ रचनाकारों में होती है। कोहली जी ने साहित्य की सभी प्रमुख विधाओं (उपन्यास व्यंग्य नाटक कहानी) एवं गौण विधाओं (संस्मरण निबन्ध पत्र आदि) और आलोचनात्मक साहित्य में अपनी लेखनी चलायी। हिन्दी साहित्य में महाकाव्यात्मक उपन्यास की विधा को प्रारम्भ करने का श्रेय नरेन्द्र कोहली को ही जाता है। पौराणिक एवं ऐतिहासिक चरित्रों की गुत्थियों को सुलझाते हुए उनके माध्यम से आधुनिक समाज की समस्याओं एवं उनके समाधान को समाज के समक्ष प्रस्तुत करना नरेन्द्र कोहली की अन्यतम विशेषता है। नरेन्द्र कोहली सांस्कृतिक राष्ट्रवादी साहित्यकार हैं जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय जीवन-शैली एवं दर्शन का सम्यक् परिचय करवाया है।
वाणी प्रकाशन ग्रुप से प्रकाशित कोहली जी की रचनाएँ: अभ्युदय (दो भाग), महासमर 1: बन्धन, महासमर 2: अधिकार, महासमर 3: कर्म, महासमर 4: धर्म, महासमर 5: अन्तराल, महासमर 6: प्रच्छन्न, महासमर 7: प्रत्यक्ष, महासमर 8: निर्बन्ध, महासमर (रजत संस्करण-9 खण्डों में), महासमर (विशेष संस्करण-9 खण्डों में ही उपलब्ध), सैरन्ध्री, न भूतो न भविष्यति (व्यास सम्मान 2013), मत्स्यगन्धा, हिडिम्बा, कुन्ती, शिखण्डी, सुभद्रा (उपन्यास), मेरे राम : मेरी रामकथा, पुनरारम्भ, अवसर, दीक्षा, संघर्ष की ओर, युद्ध (दो भाग), देश के हित में, सागर-मन्थन (उपन्यास); हम सबका घर (बाल उपन्यास); समग्र कहानियाँ (दो भाग); व्यंग्य गाथा (दो भाग), मुहल्ला, वह कहाँ है, सबसे बड़ा सत्य, हुए मर के हम जो रुसवा, नामचर्चा, देश के शुभचिन्तक, त्राहि त्राहि, इश्क़ एक शहर का, राम लुभाया कहता है, आयोग, सपने में आये तीन परिवार, गणतन्त्र का गणित, किसे जगाऊँ, प्रतिनाद, स्मरामि (व्यंग्य); किष्किंधा, अगस्त्य कथा (नाटक);
हिन्दी उपन्यास : सृजन और सिद्धान्त, प्रेमचन्द (आलोचना); जहाँ है धर्म वहीं है जय, नरेन्द्र कोहली ने कहा (विचार-लेख), Bondage : Story of Bhishma, The Return।
सम्मान: पद्मश्री सम्मान, व्यास सम्मान, शलाका सम्मान, पंडित दीनदयाल उपाध्याय सम्मान, अट्टहास सम्मान।
निधन : 17 अप्रैल, 2021।

"

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