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Hindi Ghazal Ka Vartman Dashak (हिन्दी ग़ज़ल का वर्तमान दशक)

Original price was: ₹325.00.Current price is: ₹211.00.

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हिन्दी ग़ज़ल का वर्तमान दशक –
हिन्दी में ग़ज़ल अपना स्थान बना चुकी है। वह शायरी के दूसरे रूपों के साथ-साथ पंख पसारे आकाश का बहुत सारा विस्तार नाप चुकी है। अब वह किसी एक भाव-भूमि या विषय-क्षेत्र की चीज़ न रहकर आदमी की ज़िन्दगी की मुकम्मल तस्वीर बन चुकी है। व्यक्ति से समाज, और समाज से आगे पूरी दुनिया जहान के स्पन्दन अब उसमें सुने जा सकते हैं। उसमें व्यक्ति-मन के हर्ष-अवसाद के साथ पूरे समाज का यथार्थ अपनी पूरी भयावहता में विद्यमान है।
‘हिन्दी ग़ज़ल का वर्तमान दशक’ जिसे हिन्दी ग़ज़ल के गम्भीर और समर्पित अध्येता सरदार मुजावर ने सम्पादित किया है, और जिसके तहत वर्तमान दशक के 19 ग़ज़लगो अपनी चुनिन्दा ग़ज़लों के साथ हमसे मुखातिब हुए हिन्दी में अपने ढंग की यह पहली किताब है। जिन स्वनामधन्य ग़ज़ल कहने वालों की चुनिन्दा ग़ज़लें इस संकलन में बानगी के तौर पर हमारे सामने पेश की गयी हैं-उनका सम्बन्ध हमारे समय से है और लगभग सारे के सारे अपने फन में माहिर हैं : –बानगी देखिए।

छोड़ जायेंगी ये आँगन बेटियाँ !
इक पराये घर का हैं धन बेटियाँ!
सामने आयी तो याद आ जायेगा!
हैं बड़े-बूढ़ों का बचपन बेटियाँ!
ख़ुश्क रेगिस्तान-सी है ज़िन्दगी!
और रिमझिम मस्त सावन बेटियाँ!
-कुँवर बेचैन

अपनी तन्हाई को सीने से लगाये रखिए,
गम हज़ार आयें मगर उनको भुलाये रखिए।

मुँह की निकली तो उड़ा लेंगे ज़माने वाले।
अपनी हर बात को होंठों से दबाये रखिए। – सविता चड्ढा

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Edited By Dr. Sardar Mujawar (सम्पादक – डॉ. सरदार मुजावर)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

228

Year/Edtion

2014

Subject

Criticism

Contents

N/A

About Athor

"सरदार मुजावर –
जन्म : 5 मई, 1958, कोल्हापुर, महाराष्ट्र
शिक्षा : एम.ए., डी.लिट्.
प्रकाशित पुस्तकें : हिन्दी ग़ज़ल के विविध आयाम; हिन्दी
ग़ज़ल की नई दिशाएँ; हिन्दी ग़ज़ल – ग़ज़लकारों की नज़र में हिन्दी ग़ज़ल का वर्तमान दशक; दुष्यन्त कुमार की ग़ज़लों का समीक्षात्मक अध्ययन; झरोखे से झाँकता चाँद; हिन्दी की छायावादी ग़ज़ल।
यू.जी.सी. बृहद् शोध परियोजनाएँ : हिन्दी में ग़ज़ल की अवधारणा, विकास और उसका मूल्यांकन; राष्ट्रीय एकता के परिप्रेक्ष्य में हिन्दी ग़ज़लों का समीक्षात्मक अध्ययन; हिन्दी में दोहा काव्य- एक साहित्यिक एवं सामाजिक अध्ययन।
यू.जी.सी. लघु-शोध परियोजनाएँ : महाराष्ट्र में हिन्दी दशा एवं दिशा; दुष्यन्त कुमार की ग़ज़लों का समीक्षात्मक अध्ययन।
पुरस्कार एवं सम्मान : महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी का वर्ष 2007 का बाबूराव विष्णु पराड़कर पुरस्कार; पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी, शिलांग (मेघालय) का वर्ष 2008 का पुरस्कार; अखिल भारतीय साहित्य संगम, उदयपुर (राज.) का साहित्य-सरताज पुरस्कार; शिवाजी विश्वविद्यालय का आदर्श शिक्षक पुरस्कार; युवा समूह प्रकाशन, वर्धा का राज्य स्तरीय गौरव पुरस्कार, "

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