| जिस घास के तिनके ने तूफ़ान से दोस्ती कर ली, तूफ़ान उसका
कुछ बिगाड़ नहीं सकता। तूफ़ान आएगा और वह आकाश में उड़ने का मज़ा लूटेगा…. ܀܀܀ इस ग्रन्थ से हमारे पास जो प्रश्न हैं उनके उत्तर तो मिल ही जाएँगें, सम्भवतः उन प्रश्नों के भी उत्तर मिल जाएँगे जिनके लिए हमारे पास प्रश्न नहीं हैं।…. डॉ. डी. वाय. पाटील ܀܀܀ यह किताब जो तूफ़ान में मुस्कुराने की कला सिखा रही है, वह अच्छे समाज के सृजन में ज़रूर कारगर होगी।… …. राजविन्दर सिंग, जर्मनी (भू. नेशनल फेलो ऑफ आई.आई.ए.एस.) |
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Aadhi Rat Jagane Aaya Hoon (आधी रात जगाने आया हूँ )
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| जिस घास के तिनके ने तूफ़ान से दोस्ती कर ली, तूफ़ान उसका
कुछ बिगाड़ नहीं सकता। तूफ़ान आएगा और वह आकाश में उड़ने का मज़ा लूटेगा…. ܀܀܀ इस ग्रन्थ से हमारे पास जो प्रश्न हैं उनके उत्तर तो मिल ही जाएँगें, सम्भवतः उन प्रश्नों के भी उत्तर मिल जाएँगे जिनके लिए हमारे पास प्रश्न नहीं हैं।…. डॉ. डी. वाय. पाटील ܀܀܀ यह किताब जो तूफ़ान में मुस्कुराने की कला सिखा रही है, वह अच्छे समाज के सृजन में ज़रूर कारगर होगी।… …. राजविन्दर सिंग, जर्मनी (भू. नेशनल फेलो ऑफ आई.आई.ए.एस.) |
| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Manik Munde (माणिक मुंडे) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 468 |
| Year/Edtion | 2015 |
| Subject | Novel |
| Contents | N/A |
| About Athor | "माणिक बाबुराव मुंडे जन्म : 14 अक्तूबर, 1960; सोनहिवरा, ताल्लुका : परली-वैजनाथ, बीड, महाराष्ट्र शिक्षा : एम.एससी. (कृषि) लेखन – उपन्यास : लढा कुणाशी? (मराठी), आम्हीं डोंगरवासी (मराठी) काव्य : मकरंद (मराठी), आइना-मुआइना (हिन्दी)।" |













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