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Vibhajan Ki Kahaniyan (विभाजन की कहानियाँ)

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“विभाजन की कहानियाँ –
सभ्यता ने जब-जब अपनी पुस्तक में विकास के अध्यायों को जोड़ा है, जंगों का जन्म हुआ है। यह कोई नई बात नहीं है। मुल्क हिन्दोस्तान इसी सिलसिले की एक कड़ी है। मुल्की ग़ुलामी से निजात ने जिन ‘चीथड़ों’ को जन्म दिया, वे साम्प्रदायिकता के लहू के रंगे थे। यद्यपि इसे इस आँख से भी देखना चाहिए कि आपस की नाइत्तेफ़ाकी केवल अंग्रेज़ों की ‘फूट डालो और शासन करो’ राजनीति का परिणाम नहीं थी, हमारे अपने दिमाग़ भी दाग़दार थे, या हो चुके थे। हाँ, यह सच है कि साम्प्रदायिकता के उन्माद को जब-जब टटोलने की बात चलती है तो इसे सीधे अंग्रेज़ी राजनीति से जोड़कर अपना दामन बचाने की कोशिश की जाती है।
मगर पूरा-पूरा सच यह नहीं है। कुसूरवार कहीं हम भी रहे हैं। और यह जो अपनी पुरानी संस्कृति के खुलासे में मिला हुआ दिमाग़ रहा है… जिसमें वर्षों से यह बैठाया जाता रहा है… इतनी सारी नदियाँ, इतने सारे पहाड़… इतने सारे रंग, नस्ल और अलग-अलग देशों से आये ‘चीथड़े’… यह जो, एक देश को ‘सेकुलर’ बनाने के पीछे हर बार, जबरन ‘पैबन्दों’ की बैसाखियों का सहारा लिया गया – आप मानें न मानें इन्होंने भी जहनो-दिमाग़ के बँटवारे को जन्म दिया। दरअसल टुकड़े आर्यावर्त के नहीं हुए। टुकड़े हुए दिमाग़ के… और इनसे फूटी एक कोड़नुमा संस्कृति… इनसे उपजा साम्प्रदायिकता का उन्माद।

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Edited by Musharraf Alam Zauqi (सम्पादक : मुशर्रफ़ आलम ज़ौक़ी)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

176

Year/Edtion

2008

Subject

Story

Contents

N/A

About Athor

"मुशर्रफ़ आलम जौकी –

जन्म : 24 मार्च 1962 आरा (भोजपुर) में हुआ। बचपन से ही लिखने की शुरूआत हो गई। पहला उपन्यास अकाब की आँखें सत्रह वर्ष की उम्र में लिखा। कहानी संग्रह : बाज़ार, वेश्या और कन्डोम, लबॉरटरी, गुलामबख्श, फरिश्ते भी मरते हैं (ये सब हिन्दी में प्रकाशित) भूखा इथोपिया, मंडी, गुलामबख़्श, सदी को अलविदा कहते हुए, , लैडरस्केप के घोड़े (उर्दू में प्रकाशित कहानी संग्रह) उपन्यास : बयान, मुसलमान (हिन्दी में प्रकाशित) नीलामघर, पोकेमान की दुनिया, ज़िब्ह, मुसलमान, बयान, शहर चुप है (उर्दू में प्रकाशित संग्रह ) । प्रोफेसर एस. की अज़ीब दास्तान वाया सुनामी (उर्दू में शीघ्र प्रकाश्य) संपादित पुस्तकें : सुर्ख बस्ती (दो भाग में), जनपथ (आरा) के उर्दू विशेषांक का संपादन, 'हंस' के मुसलमान विशेषांक में सह-संपादक की भूमिका निभाई। जंगली कबूतर, अहमद कासमी नदीम की कहानियाँ, बेदी की कहानियाँ, जोगेन्द्र पॉल की कहानियाँ, इस्मत चुगताई की कहानियाँ, विभाजन की कहानियाँ आदि वाणी प्रकाशन से शीघ्र प्रकाश्य । नाटक : गुड बॉय राजनीति (हिन्दी में), चार ड्रामे (उर्दू में) सम्मान एवं पुरस्कार : कृष्णचन्द्र पुरस्कार, कथा-आजकल सम्मान, दिल्ली उर्दू अकादमी का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सम्मान, जामिया अलीगढ़ का मिलीनियम सम्मान और सर सैयद सम्मान से सम्मानित ।

"

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