“इस वक़्त अमेरिका अपने तारीखे पागलपन के इन्तहाई भयानक दौर में दाख़िल हो चुका है।
बुश और उसकी फ़ौज अमेरिकी गुस्से को बिन लादेन से सद्दाम हुसैन की तरफ़ मोड़ने में कामयाब हो चुकी है। शायद ही किसी हुकूमत ने बेहतरीन प्रॉपगैंडा मशीनरी के जरिये लोगों की आँखों में धूल झोंकने में इस क्रद्र कामयाबी हासिल की हो।
सदर बुश ने अमेरिकियों को यह यक़ीन दिला दिया है कि उनकी मेयार-ए-जिन्दगी हमेशा-हमेशा के लिए एक जैसी रहेगी। अगर वे लोग यह नहीं समझते कि ऐसा नामुमकिन है, तो हम सबों को इसकी भारी क्रीमत चुकानी पड़ेगी। अमेरिकियों को समझना चाहिए कि बुश पर उनका भरोसा ग़लत है।
चार्ल्स, आओ सीधी तरह से इस मामले को देखें। दरअसल, जो चीज दाँव पर लगी है। वह ‘ Axis of Evil’ नहीं बल्कि तेल, पैसा और इन्सानी जिन्दगियाँ हैं। सद्दाम की बदकिस्मती यह है कि वह दुनिया के दूसरे बड़े कुएँ पर बैठा है। सीधी और साफ़ बात यह है कि बुश उसे हासिल करना चाहता है।
यह कहना कि बग़दाद अपन पड़ोसियों के लिए और अमेरिका या बरतानिया के लिए ख़तरा है, ऐसा ही है जैसा हाथी का चींटी से मुक़ाबला किया जाये। सद्दाम के ‘weapons of mass destruction’, अगर वाक़ई उसके पास है, तो भी अमेरिकी और इज़राइली हथियारों के मुक़ाबले में राई के बराबर भी नहीं। अमेरिकी और इजराइल के पास हथियारों का ऐसा जखीरा है कि वह पाँच मिनट में सद्दाम का काम तमाम कर सकते हैं। अगर उन्होंने ऐसा किया तो यह दुनिया की बर्बादी की शुरुआत होगी।
यह शायद इकलौता तरीक़ा होंगा, उस बोझ को हल्का करने का जो गोरी चमड़ी वालों ने अपने ऊपर ले रखा है, दुनिया पर हमेशा के लिए हुक्मरानी करने का। अगर इन्सानी नस्ल ख़त्म हो गयी तो कुछ नहीं बिगड़ेगा, मगर ख़तरा यह है कि हम अपने साथ-साथ सभी जानदारों को ले डूबेंगे।
और हम और तुम यह कहने के लिए नहीं बचेंगे कि ‘देखा मैंने कहा था।’
1 महेश भट्ट
प्रसिद्ध लेखक व फ़िल्म निर्देशक
“















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