(अनामिका का यह उपन्यास सीता के व्यक्तित्व के गहनतम पक्षों का उद्घाटन एक ऐसी भाषा में करता है जिसमें शताब्दियों की अन्तर्ध्वनियाँ हैं। यह इतनी व्यंजक, सरस और ठाठदार है जितनी भामती, भारती, लखिमा देवी की परम्परा की मैथिल स्त्री की भाषा होनी ही चाहिए! सीता तर्क करती हैं पर मधुरिमा खोए बिना, “सिया मुस्काये बोलत मृदु बानी” वाली लोकछवि धूमिल किये बिना, एक क्षण को भी सन्तुलन खोए बिना वे सबसे राय-विचार करती हैं-माँ-बाबा से, बहनों से, बालसखाओं से, सब महाविद्याओं से, वनदेवियों, आदिवासी स्त्रियों से, वाल्मीकि से, राम से, लक्ष्मण से, लव-कुश से, केवट-वधू से, अग्नि से, शम्बूक बाबा और शूर्पणखा से, स्वयं से और वैद्यराज के अनुगत रूप में रुद्रवीणा सीखने आये रावण से भी। वे एक सहज प्रसन्न सीता हैं जिन्होंने एकल अभिभावक के सब दायित्व हँसमुख ढंग से निभाये हैं। वाल्मीकि के आश्रम में आये ऋषि-मुनियों से, आश्रम के एक-एक पेड़-पौधे, जीव-जन्तु से उनका सहज संवाद का नाता है। वे वैद्य के रूप में एक पर्यावरणसजग सीता हैं और उन्हें पारिस्थितकीय स्त्री-दृष्टि के आलोक में भी पढ़ा-समझा जा सकता है। राम से भी उनका पत्राचार बना हुआ है-पति-पत्नी राय करके ही अलग हुए हैं। सीता जंगल में राक्षस सन्ततियों के लिए एक पाठशाला चलाती हैं क्योंकि उनका दृढ़ मत है कि प्रकृति और संस्कृति के बीच के द्वन्द्व में आदिवासी/राक्षस संस्कृति का हिंसक शमन उन्हें हमेशा प्रतिक्रियावादी ही बनाये रखेगा। युद्ध नहीं, सरस शिक्षा है असल समाधान। मर्यादा पुरुषोत्तम यहाँ सीता के हर निर्णय का आदर करते हैं पर युगीन धर्मशास्त्र राम को हृदय की बात मानने से रोकता है। कई तरह की ऊहापोह के बाद क्या निर्णय लेते हैं दोनों मिलकर-यह तो आप उपन्यास में ही पढ़ें।
| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Mohammad Ali 'Sahil' (मोहम्मद अली 'साहिल') |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 136 |
| Year/Edtion | 2023 |
| Subject | Ghazal Collection |
| Contents | N/A |
| About Athor | "मोहम्मद अली 'साहिल' का जन्म 12 अगस्त, 1964 को क़स्बा-बाबरपुर, जनपद इटावा, उ.प्र. में हुआ। हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट में प्रथम स्थान के साथ ही जनता महाविद्यालय, अजीतमल, इटावा से आपने बी.एससी. (कृषि) में भी प्रथम स्थान प्राप्त किया। वर्ष 1990 से आपने उ.प्र. पुलिस विभाग में गोपनीय सहायक पद से सेवा प्रारम्भ की तथा वर्तमान में लखनऊ में निरीक्षक (गोपनीय) के पद पर कार्यरत हैं। बचपन से ही संगीत व साहित्य के प्रति लगाव ने कालान्तर में आपको मशहूर शायर बना दिया। पुलिस की नौकरी और शायरी दो मुखतलिफ़ राहों का सफ़र है परन्तु आप अपनी लगन व परिश्रम से दोनों राहों पर मज़बूती से चल रहे हैं। पुलिस विभाग द्वारा आपको वर्ष 2005 में सराहनीय सेवा सम्मान एवं वर्ष 2019 में उत्कृष्ट सेवा सम्मान से नवाज़ा जा चुका है। वर्ष 2012 में आपका ग़ज़ल-संग्रह पहला कदम एवं वर्ष 2014 में किरदार प्रकाशित हो चुका है तथा इन दोनों पुस्तकों को उत्तर प्रदेश राजकीय कर्मचारी साहित्य संस्थान द्वारा फ़िराक़ गोरखपुरी व अकबर इलाहाबादी सम्मान (51-51 हज़ार रुपये की धनराशि सहित) हेतु चयनित कर इन्हें सम्मानित किया गया। इसके अलावा कई महत्त्वपूर्ण सम्मान यथा-युवा रत्न, अवध गौरव, साहित्य जवाहर, ह्यूमन एवार्ड, काव्य मनीषी, सृजन स्वर्ण, शान-ए-उत्तर प्रदेश, रोटरी वर्ल्ड पीस एवार्ड, वरिस-ए-अवध, लखनऊ सेवा रत्न, यू.पी. गौरव, समाज सेवा रत्न, रवीन्द्रनाथ टैगोर, अवध कोहिनूर, साहित्य श्री व उत्तर प्रदेश गौरव जैसे अनेक सम्मान आपको प्राप्त हो चुके हैं। आपके साक्षात्कार व रचनाओं को देश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं/रेडियो/दूरदर्शन व सोशल मीडिया आदि पर प्रकाशित व प्रसारित किया जा चुका है तथा सोशल मीडिया पर काफ़ी लोकप्रिय भी हैं। आपके वीडियो ग़ज़ल एल्बम 'तेरी सूरत' को मशहूर म्यूज़िक कम्पनी 'टी-सीरीज़' द्वारा अपने यू-ट्यूब चैनल पर लॉन्च किया गया है। आप फ़िल्म राइटर्स एसोसिएशन व इंडियन परफार्मिंग राइट सोसाइटी के सदस्य भी हैं। सम्पर्क : 34, हसन गार्डन कॉलोनी, कमता, चिनहट, लखनऊ-226028 (उ.प्र.) मो.: 09415197772, 08181967009 ई-मेल : sahil7772@gmail.com" |















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