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Sinhapura : Dweep Desh ki Pravasi Kavita (सिंहापुर : द्वीप देश की प्रवासी कविता )

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“यह काव्य-संग्रह साधारण संग्रह नहीं है, बल्कि यह सिंगापुर के विशद प्रवासी साहित्य का जीवन्त दस्तावेज़ है। यह सिंगापुर का ऐसा पहला काव्य-संग्रह है, जिसमें 27 कवियों को शामिल किया गया है, यानी लगभग इसमें हर वह कवि शामिल है, जिसने अपने भावों को शब्दों में उतारकर काव्य बुना हो। यह संग्रह एक गतिमान मंच है, जहाँ अनुभवी और नवोदित कवियों की कविताएँ एक साथ मिलकर इस प्रदेश के साहित्य की सुन्दरता को नये आयाम दे रही हैं। यह संग्रह उन कवियों का प्रतिनिधित्व करता है, जो सिंगापुर में रहते हुए भारतीय संस्कृति और परम्पराओं से जुड़े हैं, और अपनी रचनात्मकता से उसे अभिव्यक्ति दे रहे हैं। इनकी कविताओं में प्रवासी जीवन की चुनौतियाँ, सांस्कृतिक समन्वय और वैश्विक दृष्टिकोण का अद्भुत मिश्रण है। कई कविताएँ हमें भीतर झाँकने, तो कई जीवन की छोटी-बड़ी बातों को नये नज़रिये से देखने के लिए प्रेरित करती हैं। यह विभिन्न कवियों की अनूठी शैलियों और दृष्टिकोणों का समागम है। यह इस छोटे-से द्वीप देश की हिन्दी साहित्यिक धरोहर को नयी पहचान देता है। इन कविताओं में व्यक्तिगत अनुभवों के साथ-साथ सामूहिक चेतना की अभिव्यक्ति भी है।
इस संग्रह में विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों से जुड़े रचनाकार हैं, उनके अनुभव और कार्यों की छाया उनकी कविताओं में परिलक्षित होगी। समसामयिक विषयों पर कवि तथा कवयित्रियों ने अपनी लेखनी चलायी है। कविताओं में अनेक रसों एवं भावों का समावेश है। कुछ कवियों की कविताओं को सम्भवतः प्रथम बार पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया है, जो उनके लिए पाठक वर्ग तक पहुँचने में एक सुगम मार्ग सिद्ध हो सकता है। कविताओं के पीछे हिन्दी भाषा के विकास और उन्नति की भावना छिपी है। यह संकलन हिन्दी साहित्य को लोकप्रिय करने का एक स्वप्न है एवं यह भी भरोसा है कि हिन्दी कविता का भविष्य नये उत्साही और मँजे हुए रचनाकारों के साथ उज्ज्वल है। हम आशा करते हैं कि ‘सिंहापुरा’ काव्य-संग्रह को जहाँ-जहाँ भी हिन्दी भाषी प्रेमी हैं, वहाँ-वहाँ इसे सराहना मिलेगी।
-चित्रा गुप्ता

★★★

कहते हैं न, हर चीज़ के लिए नियत समय होता है और सम्भवतः यही समय है जब सिंगापुर के कवियों के रचना-संसार में विविधता को इस संग्रह के माध्यम से देखा जा सके। इन अभिव्यक्तियों में कहीं देश की याद है तो कहीं प्रवास की महक, किसी ने भोजन को माध्यम बनाया है तो किसी ने अपने कक्ष को माध्यम बनाकर अपनी भावनाएँ प्रकट की हैं। कहीं बोलियों के रस-भरे रिश्ते को भाषाई आवरण में जोड़ने की सुन्दर चेष्टा है, कहीं ईश्वर से वार्तालाप है तो कहीं स्मृति से स्मृति में प्रवेश करने का भाव। कहीं उम्मीद की क़लम ने अन्तरात्मा से साक्षात्कार कराया है तो कहीं नारी व प्रेम की धाराएँ फूटी हैं। विषय, भाव, काव्य-विधा, लेखन शैली विविधता से भरे हैं जो इस छोटे-से देश में अपरिमित सम्भावनाओं के संसार की ओर इंगित कर रहे हैं। ये कविताएँ अपने शब्दों के माध्यम से संवेगों और भावों को बयाँ करने में समर्थ हैं।
-संध्या सिंह

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Edited by Chitra Gupta, Sandhya Singh (सम्पादक : चित्रा गुप्ता, संध्या सिंह )

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

254

Year/Edtion

2025

Subject

Poetry Collection

Contents

N/A

About Athor

"चित्रा गुप्ता लेखन और अध्यापन में गहन रुचि रखती हैं। इन्होंने मेरठ (उत्तर प्रदेश) विश्वविद्यालय से हिन्दी में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त कर रघुनाथ गर्ल्स कॉलेज, मेरठ में प्रवक्ता के पद पर काम किया। लेखन का गहन शौक़ इन्हें किशोरावस्था से रहा। ये कविता, कहानी और लेख अनेक विधाओं में लिखती हैं। 1994 से सिंगापुर में हिन्दी सोसाइटी, डी.पी.एस., सिंगापुर तथा सिंगापुर स्कूल ऑफ़ द आर्ट्स में क्रमशः अध्यापन कार्य किया। स्थानीय पाठ्यक्रम से सम्बन्धित सामग्री बनायी । अध्यापन और लेखन के साथ बुजुर्गों की योग और हास्य योग की कक्षाएँ चलाती हैं। सम्प्रति http://www.funhindi.me के द्वारा ऑनलाइन अध्यापन करती हैं। ग्लोबल हिन्दी फ़ाउंडेशन, सिंगापुर की मार्गदर्शिका हैं। उसके तहत होने वाली काव्य- गोष्ठियों का संचालन और कविता-पाठ दोनों करती हैं। देश-विदेश की काव्य- गोष्ठियों में कविता-पाठ करती हैं तथा मंच संचालन करती हैं। पेंटिंग करने का शौक़ है। सिंगापुर में शिंज़ प्रोडक्शन के अन्तर्गत शॉर्ट फ़िल्म और सीरियल 'सास बहू सैंडविच'–भाग 2, ‘रेड स्कार्फ', 'लल्ला लल्ला लोरी' और 'रीचिंग टू द स्टार्स' (इंग्लिश मूवी) में काम किया। ये भजन लिखतीं और उन्हें स्वर देती हैं। सिंगापुर टोस्ट मास्टर्स में अनेक विषयों पर सम्भाषण दिये और पुरस्कृत भी हुईं। सिंगापुर की स्थायी निवासिनी हैं। स्वयं को गृहिणी कहलाना पसन्द करती हैं।
इनका मानना है हिन्दी भाषा के उत्थान और प्रसार के लिए क्लिष्ट भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इनकी रचनाओं के विषयों से पाठक सहजता से तादात्म्य स्थापित कर लेते हैं। “अरे! यह तो हमारे मन की बात ही लिख दी आपने…हाँ, बिल्कुल ऐसा ही हमारे साथ हुआ…"" तब ये अपने लेखन को सफल मानती हैं।
साहित्यिक गतिविधियाँ और प्रकाशन : प्रमुख भारतीय पत्रिकाओं…'बालभारती', 'गर्भनाल', 'प्रतिलिपि', 'सेतु', 'रचनाकार' और 'अमर उजाला' में कहानियाँ और कविताएँ प्रकाशित हुई हैं। फ़ेसबुक पर 'रचना पोयट्री ग्रुप' 'काव्य स्पंदन पत्रिका' में कविताएँ प्रकाशित। सिंगापुर की 'पल्लवन', सिंगापुर संगम, 'भारत-भारती' (पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया) पत्रिका में भी लेख, कविता और कहानी प्रकाशित; समीक्षा : एक उपन्यास की प्रूफ़ रीडिंग की और समीक्षा लिखी; साझा संग्रह : 'कुछ सुनी कुछ अनसुनी', 'राम काव्य पीयूष', 'कृष्णकाव्य पीयूष', ‘परिवार साहित्य-संग्रह', 'हाइकु दर्पण' (कविता-संग्रह); 'किलकारी' (बाल कहानियाँ); ‘सिंगापुर नवरस '- नौ कवि नौ रस ग्लोबल हिन्दी फ़ाउंडेशन सिंगापुर के तत्वाधान से सिंगापुर की प्रथम काव्य-पुस्तिका का सम्पादन किया। उसमें इनकी कविताएँ भी संलग्न हैं। सिंगापुर में होने वाली प्रतियोगिताओं में तथा प्रवासी भारतीय दिवस पर सिंगापुर में होने वाली निबन्ध-प्रतियोगिता में निर्णायक रहीं। इन्होंने 2020 में होने वाले ‘विश्वरंग' में पैनल डिस्कशन में प्रमुख भूमिका निभायी। काव्यात्रा (कविता-संग्रह); ‘राम हाइकू पीयूष' (सम्पादक मण्डल में); समन्दर पार इन्द्रधनुष (साझा कविता-संग्रह); तीन साझा संग्रह प्रकाशनाधीन।

★★★

डॉ. संध्या सिंह
वाराणसी, भारत में जन्मीं डॉ. संध्या सिंह ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। वर्तमान में, वे नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर में हिन्दी और तमिल भाषा विभाग की प्रमुख हैं। वे सिंगापुर की हिन्दी संस्था संगम सिंगापुर की अध्यक्ष और हिन्दी पत्रिका सिंगापुर संगम की सम्पादक भी हैं। वे हिन्दी सोसाइटी सिंगापुर की प्रबन्धन समिति में हैं। उन्होंने सिंगापुर के विश्वविद्यालयों व शैक्षणिक संस्थानों के लिए हिन्दी पाठ्यक्रम निर्माण और विभिन्न संस्थाओं से जुड़ी गतिविधियों के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई है। वे सिंगापुर के विभिन्न मंत्रालयों के लिए हिन्दी से सम्बन्धित कार्यों में सक्रिय हैं। वे भरता और सिंगापुर की कई महत्त्वपूर्ण संस्थाओं के परामर्श मण्डल का हिस्सा हैं। विभिन्न लेखों के साथ ही उनके चार प्रमुख प्रकाशन हैं, जिनमें हिन्दी सीखने के लिए 'एन इंट्रोडक्शन टू हिन्दी' (एलीमेंट्री और एडवांस लेवल) और 'सिंगापुर में भारत' (विशेष सन्दर्भ : उत्तर भारत) शामिल हैं। उन्होंने 'सिंगापुर की चयनित रचनाएँ' का सम्पादन भी किया है। उन्हें 12वें विश्व हिन्दी सम्मलेन के दौरान प्रतिष्ठित 'विश्व हिन्दी सम्मान' (फीजी 2023, भारत सरकार) के साथ ही 'प्रवासी साहित्य सम्मान', 'हिन्दी गौरव सम्मान', ‘हिन्दी सेवी सम्मान' और 'हिन्दी शिक्षण सम्मान' जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं।

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