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Safalata Ke Sopan (सफलता के सोपान )

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Original price was: ₹450.00.Current price is: ₹292.00.

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“बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ. अशोक कुमार गदिया ने शिक्षा जगत में राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर मेवाड़ विश्वविद्यालय, चित्तौड़गढ़ के माध्यम से अपनी अनूठी पहचान बनायी है। अध्ययन में रुचि रखने वाले जनसाधारण एवं दूरस्थ वंचित वर्ग के शिक्षार्थियों का जीवन ज्ञान के प्रकाश से आलोकित हो, यह इनके जीवन का प्रमुख सेवामूलक उद्देश्य रहा है। वे चाहते हैं कि छात्र पढ़- 5-लिखकर परिवार के लिए तो अच्छे पुत्र-पुत्री सिद्ध हों ही, अपितु वे समाज के लिए भी सामाजिक मान्यताओं एवं अपेक्षाओं की कसौटी पर स्वयं को अच्छा सदस्य बनायें। इसके साथ ही वे राष्ट्रीय जनतान्त्रिक जीवन-मूल्यों के मानक पर स्वयं को एक सुसंस्कृत नागरिक सिद्ध कर सकें और वे इक्कीसवीं शताब्दी के अनुरूप एक सफल जीवन व्यतीत करें।
उक्त उदात्त उद्देश्य से सम्बन्धित बिन्दु-बिन्दु विचार के रूप में डॉ. गदिया ने सैकड़ों चिन्तन-प्रधान विचारों को अभिव्यक्ति प्रदान की है। ये समस्त विचार वर्गीकृत रूप में सफलता के सोपान शीर्षक के साथ पुस्तकाकार में प्रस्तुत हैं। इस पुस्तक को पढ़कर युवा पीढ़ी में शिक्षा के माध्यम से अच्छे इन्सान में अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन की लगभग सभी संकल्पनाएँ साकार करने का प्रयास रहा है, जो जनतान्त्रिक मूल्यों के प्रति आस्थावान राष्ट्र के लिए आवश्यक हैं, जो वर्तमान शिक्षा का उद्देश्य भी है।
यह पुस्तक 27 सोपानों में वर्गीकृत है, जो भारतीय जीवन-दर्शन के अनुरूप असीम सत्ता में विश्वास रखने की उदात्त भावना के साथ ‘ईश्वर में आस्था ‘ के प्रकरण से प्रारम्भ होती है, जो उन शिक्षार्थियों को इक्कीसवीं शताब्दी के अनुरूप सफल जीवन व्यतीत कर सकने योग्य एक अच्छा इन्सान बनाने में सक्षम है। आगे के अध्यायों में पारिवारिक दृष्टिकोण से माता-पिता के मधुर सम्बन्धों द्वारा अच्छे पुत्र-पुत्री बनने की प्रेरणा के साथ समाज के लिए अच्छे सदस्य सिद्ध होने का सन्देश है। इसके लिए बालक को स्वयं की शारीरिक शक्ति एवं मानसिक क्षमता को पहचान कर लक्ष्य निर्धारित करने की आवश्यकता पर बल है। इस पुनीत कार्य में स्वास्थ्य सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते हुए सचेत रहने एवं सकारात्मक सोच के साथ स्वाध्याय और आत्मानुशासन की भूमिका का सार्थक प्रतिपादन है। सफल जीवन की ओर अग्रसर होने के लिए थोड़ा-थोड़ा किन्तु अनवरत परिश्रम करते रहने तथा असफलता पर निराश न होने के साथ परिश्रम में रही कमी को खोजकर उसे दूर करने का उद्बोधन है। समय और परिस्थिति के अनुसार सफलता के मार्ग में आने वाली बाधाओं को सहनशील होकर उत्साह एवं धैर्य के साथ उन्हें पार करने के अथक प्रयास की महत्ता की अभिव्यक्ति है। इसके साथ ही स्वस्थ मानसिकता एवं आत्मविश्वास के रहते हुए झूठ एवं अहंकार से बचकर जीवन में अहिंसक विचारधारा अपनाने के साथ सफलता के मार्ग पर अग्रसर होना सुनागरिक बनने की कसौटी है। इससे जीवन में उल्लास एवं उमंगों का संचार होता है, जो सुखी और प्रसन्न जीवन की आधारशिला है। पुस्तक का समापन जीवन में सफलता हेतु शाश्वत, सार्थक एवं अनुकरणीय कतिपय सूक्तियों के साथ होता है, जिन्हें आत्मसात करने की प्रबल आवश्यकता है।
वस्तुतः इस पुस्तक के सम्पादन में विषयवस्तु को इस प्रकार संयोजित करने का प्रयास रहा है कि कथ्य के साथ पाठक स्वयं के द्वारा किये जा रहे क्रियाकलापों की तुलना करते हुए इसे रुचिपूर्वक पढ़ें और स्वयं में आवश्यक व्यवहारगत परिवर्तन लाने हेतु अनुभव कर उनका परिमार्जन करें और स्वयं को अच्छा नागरिक सिद्ध करें। हमें पूरा विश्वास है कि यह प्रयास सार्थक होगा और पाठक इससे लाभान्वित होकर देश के लिए स्वयं को सुसंस्कृत नागरिक सिद्ध करेंगे। इसी आशा के साथ—
—शिव मृदुल (सम्पादक)

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Dr. Ashok Kumar Gadiya, Edited by Pro. Shiv Mridul (डॉ. अशोक कुमार गदिया, सम्पादन : प्रो. शिव मृदुल )

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

144

Year/Edtion

2025

Subject

Self-Help

Contents

N/A

About Athor

"डॉ. अशोक कुमार गदिया :
शिक्षा : बी. काम., एफ.सी.ए., पीएच.डी.।
डॉ. अशोक कुमार गदिया ने वाणिज्य स्नातक की परीक्षा राजस्थान विश्वविद्यालय से वर्ष 1980 में उत्तीर्ण की। जनवरी 1988 में आपने 'द इंस्टिट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड एकाउंट्स ऑफ़ इंडिया' की सदस्यता प्राप्त की। आपको कराधान के क्षेत्र में 38 वर्षों का अनुभव है आपका प्रारम्भ से ही शिक्षा के क्षेत्र से अनन्य सम्बन्ध रहा है।
आपका यह मिशन है कि गरीब से गरीब घरों और गाँवों का बच्चा अपने विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर, एक ज़िम्मेदार नागरिक बनकर देश की सेवा के लिए सामाजिक जीवन में प्रवेश करे। वह चाहते हैं कि हमारा बच्चा आत्मविश्वास से भरा हुआ हो, देशभक्त हो, समाज के प्रति संवेदनशील हो, जिसके मन में हमारे राष्ट्रीय महापुरुषों का अभिमान हो तथा उसकी धमनियों में राष्ट्रीय महापुरुषों का रक्त प्रवाहित हो रहा हो, ऐसी उदात्त भावना के साथ एक सशक्त नौजवान तैयार हो। इस पुनीत कार्य में वह रात-दिन लगे हुए हैं। यहाँ पर जम्मू-कश्मीर, बिहार, नागालैंड, मणिपुर, झारखण्ड और छत्तीसगढ़ का ज़िक्र करना समीचीन होगा। आप स्वयं वहाँ जाकर, ग़रीब से गरीब घरों से हज़ारों की संख्या में बच्चे लाकर, उनको पढ़ा-लिखाकर, प्रशिक्षण देकर और उनकी नौकरी लगवाकर राष्ट्र की मुख्यधारा में ला चुके हैं। उनका कथन है कि 'जहाँ कोई नहीं पहुँचता वहाँ स्वयं ही पहुँचकर (Reach to Unreached) ग़रीब बच्चों को लाना, पढ़ाना-लिखाना, भारतीय संस्कार देना और नौकरी दिलवाकर या उनका स्वयं का व्यवसाय शुरू करवाकर, राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके लिए चाहे कितना भी संघर्ष क्यों न करना पड़े, लेकिन यह राष्ट्रीय कार्य हर हाल में करेंगे।'
वर्तमान में आप भारत के विभिन्न संस्थानों के महत्त्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं। मेवाड़ ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशंस एवं मेवाड़ विश्वविद्यालय के आप संस्थापक, चेयरमैन हैं। भारत के 29 राज्यों से और 20 देशों से मेवाड़ विश्वविद्यालय एवं उनके अन्य संस्थानों में विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करने आ रहे हैं, जिनकी संख्या अभी लगभग 14,000 है।
आपकी अब तक प्रकाशित पुस्तकों में ‘मेरे अनुभव और इतिहास के झरोखे से कश्मीर’, ‘गुरुगोविन्द सिंह’, ‘बस अब बहुत हो चुका’, ‘मेरी क्रान्तिकारी योजना’, ‘सफलता के रहस्य’ (प्रथम एवं द्वितीय संस्करण), ‘वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप’, ‘नया ज़माना-नये उजाले’, ‘ऐसे होगा हमारे नवभारत का निर्माण’, ‘तनाव रहित जीवन जीने का रहस्य’, ‘राष्ट्रीय नवचेतना के सजग संवाहक’, ‘मेवाड़-मार्ग-निर्देशिका’, ‘भोर की रश्मियाँ’ (कविता-संग्रह), ‘जीएसटी’ (गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स) के सह-लेखक, ‘दिल्ली मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम’ 2005 (वैट) तथा विभिन्न शोधपत्र देश-विदेश की पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं।
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