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Ram : Janat Tumhahi Tumhai hoi jai (राम : जानत तुम्हहि तुम्हाइ होइ जाई )

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Original price was: ₹625.00.Current price is: ₹406.00.

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“राम भारतीय चेतना की प्राणवायु हैं। युग-युगान्तर से मानव सभ्यता जिन मानवीय मूल्यों को अपने भीतर सँजोते और आत्मसात करती आयी है, राम उन मूल्यों के साक्षात् प्रतिरूप हैं। वर्तमान भौतिक युग और सामाजिक विघटन के दौर में जिस तरह से मानवीय सम्बन्ध क्षीण हो रहे हैं, ऐसे में राम का उदात्त चरित्र प्रेरणादायी और मन में उत्साह जगाने वाला दिखाई पड़ता है। राम का चरित्र एक तरफ़ करुणा सम्पन्न है तो दूसरी तरफ़ वीर और पराक्रमी भी। संसार जब आतंकवाद की विभीषिका झेल रहा है, ऐसे में भी श्रीराम का यह रूप पूरे संसार को एक वैश्विक सन्देश देता है। ऐसे सर्वप्रिय व सार्वजनीन चरित्र श्रीराम का प्राचीन ऋषि-मुनियों, भक्तों-सन्तों और कवियों आदि ने तो महिमामण्डन किया ही, आधुनिक काल में विभिन्न मनीषी और चिन्तक जैसे विवेकानन्द, महर्षि अरविन्दो, बाल गंगाधर तिलक, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, महात्मा गांधी, विनोबा भावे और राम मनोहर लोहिया आदि भी राम चरित्र से बहुत प्रभावित थे, और उन्होंने राम को अपने लेखन का विषय बनाया। प्रस्तुत पुस्तक इक्कीसवीं सदी में राम को नयी दृष्टि से देखने का एक विनम्र प्रयास है।
—इसी पुस्तक से

★★★

यह पुस्तक एक ऐसी प्रेरणा की स्रोतस्विनी है, जिसमें विगाहन करके कोटि-कोटि मानवों के मानस निर्मल होते रहेंगे; ऐसा मेरा निरत्यय प्रत्यय है। मेरी मंगलाशंसा है कि इसी प्रकार निरंजन, निरंजन परब्रह्म भगवान राम की सेवा करते रहें।
—जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज

★★★

यह पुस्तक भारतीय जनमानस को रामकथा एवं श्रीराम के जीवन चरित्र के अनेक पक्षों से अवगत करायेगी। श्रीराम की कृपा से जिस प्रकार गोस्वामी तुलसीदास जी ने भगवान श्रीराम को भारत की प्रत्येक झोपड़ी, महल तथा जन-गण-मन में पहुँचा दिया, यह पुस्तक उसी कार्य को और आगे बढ़ायेगी, ऐसा मेरा विश्वास है।
—योगेश सिंह,
कुलपति, दिल्ली विश्वविद्यालय

★★★

यह एक पुस्तक ही नहीं बल्कि श्रीराम जी के चरित्र का बहुआयामी प्रतिबिम्ब है। इस रामचरित-सिन्धु में प्रत्येक मानव गोता लगाकर अपने अनुरूप मनोवांछित ज्ञान-रत्न प्राप्त कर सकता है।
—पद्मभूषण कपिल कपूर,
सुप्रसिद्ध भाषाविज्ञानी एवं भारतीय ज्ञान परम्परा विशेषज्ञ

★★★

रमन्ते यस्मिन् इति रामः अर्थात्, जिसमें रम जाया जाये, वही राम हैं। रामकथा असीम, अनन्त, आदर्श, आस्था और अधिष्ठान है। यह पुस्तक रामकथा के इन्हीं गुणों को पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत कर उन्हें लोकमंगल हेतु प्रयासरत रहने के लिए प्रेरित करती है।
—किशोर मकवाना,
अध्यक्ष, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, भारत

★★★

भगवान राम सर्वोत्तम भारतीय मूल्यों और धार्मिक दर्शन का प्रतिनिधित्व करते हैं। राम को समझना एक व्यक्ति के माध्यम से भारत को समझना है। यह पुस्तक हमारी प्राचीन ज्ञान परम्परा, विशेषकर रामकथा में निहित ज्ञान-विज्ञान को सरल और सामयिक सन्दर्भों में समाज के सामने लाने का महनीय कार्य करती है।
—संजय प्रताप सिंह,
एम.डी., एफ. ए. ए.एन., एफ. ए. एन. ए.
अध्यक्ष, एलिना हेल्थ न्यूरोसाइंस, स्पाइन एंड पेन इंस्टीट्यूट, यू. एस. ए.

★★★

रामकथा और रामराज्य की संकल्पना अनादि काल से भारतीय सभ्यता का आदर्श सन्दर्भ बिन्दु रही है। राम को अनेक महान विभूतियों ने कालानुरूप परिभाषित करने का प्रयास किया है। यह पुस्तक उन्हीं सब भावों को एक साथ प्रस्तुत करती है।
—प्रफुल्ल केतकर,
प्रसिद्ध पत्रकार एवं विचारक

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Edited by Niranjan Kumar (सम्पादक : निरंजन कुमार )

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

272

Year/Edtion

2024

Subject

Religion/Culture

Contents

N/A

About Athor

निरंजन कुमार शिक्षा, संस्कृति, भाषा और पत्रकारिता के क्षेत्र में जाने-माने नाम हैं। अपनी विद्यानुरागी प्रवृत्ति के कारण निरंजन कुमार भारत की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा तथा आरबीआई ग्रेड 'बी' अधिकारी के लिए चयनित होने के बावजूद शिक्षण के क्षेत्र में आगे बढ़े। आपने अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, मिशिगन विश्वविद्यालय, एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के अतिरिक्त भारत में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और राजस्थान के महाविद्यालय में अध्यापन कार्य किया है। अपनी लेखनी के द्वारा आप लम्बे समय से जनता को, विशेषकर युवाओं को जागरूक करने का महनीय कार्य कर रहे हैं। आप 'दैनिक जागरण', ‘FIRSTPOST’ और ‘THE DAILY GUARDIAN' आदि समाचार पत्रों के सम्पादकीय पृष्ठों पर नियमित स्तम्भकार हैं, साथ ही विभिन्न टी.वी. चैनलों पर पैनल चर्चा में विषय विशेषज्ञ के रूप में आमन्त्रित किये जाते हैं। आप भारतीय शिक्षा एवं खेल परिषद् (ईएससीओआई) एवं राष्ट्रीय खेल विज्ञान एवं शारीरिक शिक्षा परिषद (एनसीएसपीई) के संयुक्त पुरस्कार 5वाँ डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम राष्ट्रीय समर्पण सम्मान' 2024, हिन्दुस्तान स्काउट्स एंड गाइड्स एसोसिएशन द्वारा शिक्षक दिवस 2021 पर देश के विशिष्ट प्राध्यापक के रूप में सम्मानित होने के अतिरिक्त हरियाणा की जैमिनी अकादमी द्वारा 2006 के 'भाषा रत्न सम्मान' समेत अनेक सम्मानों से सम्मानित हैं। अनेक भाषाओं के जानकार निरंजन कुमार के 200 से अधिक शोध आलेख प्रकाशित हैं। शताधिक राष्ट्रीय अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं आदि में आपने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी है। सम्प्रति आप दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में वरिष्ठ प्रोफ़ेसर हैं। इसके अतिरिक्त प्रशासनिक कौशल का परिचय देते हुए आप दिल्ली विश्वविद्यालय में डीन (योजना) के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं, साथ ही अध्यक्ष, मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम समिति के रूप में आपने छात्रों के समग्र व्यक्तित्व विकास के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के तहत नवोन्मेषी बहु- अनुशासनिक कोर्सेस के निर्माण में महती भूमिका निभाई है। आप भारत सरकार की माननीया पूर्व शिक्षा राज्य मन्त्री के मानद सलाहकार भी रहे हैं।

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