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Phoja Haram Da (Manto Ab Tak-13) (फोज़ा हराम दा (मण्टो अब तक-13))

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“वह अपने अनुभवों और उनकी अभिव्यक्ति के सिलसिले में किसी तरह का दबाव कबूल करने के लिए तैयार नहीं है। वह ‘पार्टी लाइन’ के नुक्ते-नजश्र से नहीं, वरन सहज मानवीय दृष्टि से हालात को परखता है और इसीलिए वह पूरी अजशदी के साथ ‘अपना बयान’ लिपिबद्ध कर सकता है। उसे पार्टी लाइन की कोई फिक्र नहीं है क्योंकि वह जानता है कि आम आदमी के दुख-दर्द को ‘पार्टी लाइनें’ कई बार नजर अन्दाज कर देती हैं, पार्टी की राह न तो जिश्न्दगी की राह है, न आम आदमी के एहसासात की। उसे मालूम है कि पार्टी को राजनीतिक स्तर पर बहुत-से समझौते भी करने पड़ते है और अक्सर पार्टी का नजरिया डाग्मैटिक हो जाता है। इसीलिए मण्टो आश्वस्त है कि जब तक वह आम आदमी की तकलीफे का सहभागी बन कर उनका सच्चा और खरा चित्रण कर रहा है, और जनता के दुश्मनों की ओर इशारा कर रहा है। तब तक उसे प्रगतिशील कहलाने के लिए किसी बिल्ले या तमग़े की जरुरत नहीं है।
मण्टो अपने चारों ओर फैले झूठ, फ़रेब और भ्रष्टाचार पर से पर्दा उठा कर, समाज के उस हिस्से को पेश करता है, जिसे लोग या तो स्वीकार करने से कतराते हैं या फिर ऐसा तो होता ही है के से अन्दाज़ ही कर सकता है। वह इस सारे भ्रष्टाचार के रू-ब-रू हो कर, उसकी भर्त्सना करता है। लेकिन वह कोरा सुधारक नहीं है, वरन एक अत्यन्त भावप्रवण संवेदनशील व्यक्ति है, इसीलिए वह समाज के इस ‘गर्हित’ पक्ष-रंडियों, भड़वों, दलालों, शराबियों में दबी-छिपी मानवीयता की तलाश करता है। वह समाज के निचले तबके के लोगों की ओर मुड़ता है और ‘आहत अनस्तित्व’ को छूने के लिए अपने ‘प्राणदायी हाथ’ बढ़ाता है।”

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Premkiran (प्रेमकिरण)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

144

Year/Edtion

2012

Subject

Ghazal

Contents

N/A

About Athor

"प्रेमकिरण –
जन्म : 15 जनवरी, 1953।
प्रकाशित कृति : आग चखकर लीजिए (ग़ज़ल संग्रह)
प्रकाशन : देश के अनेक ग़ज़ल एवं कविता संग्रहों में रचनाएँ संकलित। इनके अतिरिक्त हिन्दी एवं उर्दू की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में ग़ज़ल, कविता, कहानी, फ़ीचर, साक्षात्कार, पुस्तक समीक्षा, कला समीक्षा एवं साहित्यिक आलेख प्रकाशित।
सम्पादन : 'समय सुरभि का ग़ज़ल विशेषांक
प्रसारण : आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के हिन्दी और उर्दू विभाग से रचनाएँ प्रसारित एवं अनेक अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों तथा मुशायरे में शिरकत।
सम्मान : डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव सम्मान (2005), दुष्यन्त कुमार शिखर सम्मान (2006), शाद अजीमाबादी सम्मान (2007), बिहार उर्दू अकादमी द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित (2009)।
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