“पाँच बेहतरीन कहानियाँ –
“हम लोग लड़कियों के दीवाने थे। कोई हमारी आन्तरिक बातें सुनता तो हमें लम्पट और लुच्चा मान लेता। मगर हम ऐसे गिरे हुए नहीं थे। … सच कहूँ, हम इतने नैतिक थे कि अवसर को ठुकरा देते थे। वैसे तो हम लोगों की तरफ़ अनेक लड़कियाँ लपकती थीं। हम अपने-अपने विभाग के हीरो थे। यह भी बता दूँ कि चिकने-चुपड़े गालों, सफाचट मूँछों और दौलत की वजह से हीरो नहीं थे; बल्कि हममें से अधिसंख्य तो दाढ़ी भी रखते थे। जहाँ तक दौलत का प्रश्न है, तो हम लड़कियों से प्रायः चन्दा माँगते थे।””
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“पाँच बेहतरीन कहानियाँ –
“हम लोग लड़कियों के दीवाने थे। कोई हमारी आन्तरिक बातें सुनता तो हमें लम्पट और लुच्चा मान लेता। मगर हम ऐसे गिरे हुए नहीं थे। … सच कहूँ, हम इतने नैतिक थे कि अवसर को ठुकरा देते थे। वैसे तो हम लोगों की तरफ़ अनेक लड़कियाँ लपकती थीं। हम अपने-अपने विभाग के हीरो थे। यह भी बता दूँ कि चिकने-चुपड़े गालों, सफाचट मूँछों और दौलत की वजह से हीरो नहीं थे; बल्कि हममें से अधिसंख्य तो दाढ़ी भी रखते थे। जहाँ तक दौलत का प्रश्न है, तो हम लड़कियों से प्रायः चन्दा माँगते थे।””
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| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Akhilesh (अखिलेश) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 152 |
| Year/Edtion | 2013 |
| Subject | Collection of Short Stories |
| Contents | N/A |
| About Athor | "अखिलेश – |















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