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Nibandhon Ki Duniya : Kedarnath Agarwal (निबन्धों की दुनिया : केदारनाथ अग्रवाल)
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“प्रगतिशील लेखन के प्रमुख स्तम्भों में केदारनाथ अग्रवाल अग्रणी हैं। संवेदनशील भाव-तन्त्र और गहन वैचारिकता की संहिति से उनकी सृजनशीलता आकार लेती हैं-कविता और गद्य दोनों में।
उनकी गद्य-रचनाओं का वस्तुजगत उतना ही ठोस, मूर्त और पारदर्शी है जितना उनके काव्य का। न दुराव-छिपाव न भाषिक पेचीदगियाँ । अपने निबन्धों में उन्होंने अपनी कविता की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वैचारिक आधार का खुलासा किया है। निबन्धों में उनका बौद्धिक, अपने सृजन के वैचारिक आधार के प्रखर प्रवक्ता के रूप में सामने आता है।
उनकी शैली में ध्वंसात्मकता, हठाग्रह और दुर्भाव से नहीं निश्छल आत्मविश्वास और वैचारिक निष्ठा से पैदा होती है। केदारनाथ अग्रवाल की ख्याति यद्यपि कवि-रूप में अधिक हुई, पर उनका चिन्तक भी काव्य-सृजन के समानान्तर सक्रिय रहा। उन्होंने काव्य और जीवन से सम्बद्ध अनेक प्रश्नों पर विचार करने के अलावा अपने वर्तमान और अतीत दोनों समय-खण्डों के रचना-कर्म का लेखा-जोखा भी प्रस्तुत किया-पूरे समीक्षात्मक-विवेक के साथ । उनकी हर बात से सहमति भले ही न हो, पर उनकी वैचारिक दृढ़ता और बेबाक अभिव्यक्ति में सन्देह की गुंजाइश नहीं मिलती।
प्रस्तुत निबन्ध संग्रह इस चिन्तक रचनाकार की मानसिक बनावट और समीक्षात्मक-विवेक का साक्षात्कार कराएगा और मूलतः अभिधा की शक्ति और सौन्दर्य के कृतिकार रूप से साझेदारी का अवसर भी प्रदान करेगा।”
| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Edited By Nirmala Jain (सम्पादन – निर्मला जैन ) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 194 |
| Year/Edtion | 2012 |
| Subject | Edited By Nirmala Jain (सम्पादन – निर्मला जैन ) |
| Contents | N/A |
| About Athor | "निर्मला जैन 'निबन्धों की दुनिया' शृंखला की प्रधान सम्पादक निर्मला जैन हिन्दी के विशिष्ट आलोचकों में हैं । वे दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दी की प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रही हैं। निर्मला जैन ने बहुत-सी किताबें लिखी हैं तथा अनेक महत्त्वपूर्ण रचनाओं का अनुवाद और कई पुस्तकों का सम्पादन किया है। उनकी कुछ प्रमुख रचनाएँ हैं : रस सिद्धान्त और सौन्दर्यशास्त्र, उदात्त के विषय में (लोंगिनुस की मूल पुस्तक के अनुवाद सहित), काव्य चिन्तन की पश्चिमी परम्परा और कथाप्रसंग : यथाप्रसंग, निर्मला जैन को अनेक सम्मानों तथा पुरस्कारों से समादृत किया गया है। केदारनाथ अग्रवाल केदारनाथ अग्रवाल (1911-2000) की आरम्भिक शिक्षा स्थानीय स्कूल में और उसके बाद क्रमशः रायबरेली और कानपुर में हुई। अन्ततः इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उन्होंने बी. ए. और डी.ए.वी. कॉलेज कानपुर में एल. एल. बी. की पढ़ाई पूरी की। काव्य-रचना का संस्कार उन्होंने पिता से पाया था। घर के पुस्तकालय में सहज उपलब्ध काव्य-ग्रन्थों का कवि केदार ने लगन से अध्ययन किया। कहा जाता है कि कथा-साहित्य पढ़ने में उनकी विशेष रुचि नहीं थी। घर में ज़मीन भी थी और दुकानें भी इसलिए कृषि और व्यापार भी उनके सहज संस्कार का हिस्सा हो गये। विशेषकर किसान-चेतना का प्रभाव उनकी कविता में भरपूर दिखाई पड़ता है। उन्हें वृत्ति से किसान, पेशे से वकील और रुचि से कवि कहा जा सकता है। व्यापारी का काइयाँपन नहीं अलबत्ता समझदारी और विवेक भी उनकी मानसिक बनावट का हिस्सा अवश्य रही होगी जिसके कारण उनकी अभिव्यक्ति में मताग्रही तेवर रह रहकर प्रकट होता है। पर मुख्य रूप से वकालत के साथ-साथ वे जीवनपर्यन्त पूरी निष्ठा से साहित्य-रचना करते रहे। उनकी प्रकाशित रचनाओं में मौलिक काव्य कृतियों के अलावा, निबन्ध-संग्रह, यात्रा-वृत्तान्त, अनुवाद और मित्र संवाद' नाम से दो खण्डों में प्रकाशित पत्राचार भी शामिल है। केदारनाथ अग्रवाल की रचनाओं की कुल संख्या 29 है।" |















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