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Nibandhon Ki Duniya : Gajanan Madhav Muktibodh (निबन्धों की दुनिया : गजानन माधव मुक्तिबोध )

Original price was: ₹450.00.Current price is: ₹292.00.

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“निबन्धों की दुनिया – गजानन माधव मुक्तिबोध –
इस पुस्तक में मेरी अन्तर्यात्रा में पड़ने वाले कुछ प्रदेश हैं। यात्रा के लिए निकलती रही है बुद्धि, पर हृदय को भी साथ लेकर अपना रास्ता निकालती हुई बुद्धि जहाँ कहीं मार्मिक या भावाकर्षक स्थलों पर पहुँची है, वहाँ हृदय थोड़ा-बहुत रमता अपनी प्रवृत्ति के अनुसार कुछ कहता गया है। इस प्रकार यात्रा के श्रम का परिहार होता रहा है।
बुद्धि-पथ पर हृदय भी अपने लिए कुछ-न-कुछ पाता रहा है।

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Chief Editor Nirmala Jain Editor Krishnadutt Sharma (मुख्य सम्पादक – निर्मला जैन, सम्पादक – कृष्णदत्त शर्मा )

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

188

Year/Edtion

2009

Subject

Essays

Contents

N/A

About Athor

"प्रधान सम्पादक – निर्मला जैन –
‘निबन्धों की दुनिया' श्रृंखला की प्रधान सम्पादक निर्मला जैन हिन्दी के विशिष्ट आलोचकों में हैं। वे दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दी की प्रोफ़ेसर और विभागाध्यक्ष रही हैं। निर्मला जैन ने बहुत-सी किताबें लिखी हैं तथा अनेक महत्त्वपूर्ण रचनाओं का अनुवाद और कई पुस्तकों का सम्पादन किया है। उनकी कुछ प्रमुख रचनाएँ हैं : रस सिद्धान्त और सौन्दर्यशास्त्र, उदात्त के विषय में (लोंगिनुस की मूल पुस्तक के अनुवाद सहित), काव्य चिन्तन की पश्चिमी परम्परा और कथाप्रसंग यथाप्रसंग। निर्मला जैन को अनेक सम्मानों तथा पुरस्कारों से समादृत किया गया है।
सम्पादक – कृष्णदत्त शर्मा –
जन्म: 1942 कम्पिल, ज़िला फ़र्रुखाबाद (उ.प्र.) में उच्च शिक्षा इलाहाबाद और दिल्ली में 1971-83 हिन्दी माध्यम कार्यान्वयन निर्देशालय (दिल्ली विश्वविद्यालय) में सहायक निदेशक, फिर 1988-88 वहीं संयुक्त निदेशक 1988 से हिन्दी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन। अप्रैल 1996 से मार्च 1999 तक तोक्यो विदेशी अध्ययन विश्वविद्यालय (तोक्यो यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ़ारेन स्टडीज़), तोक्यो (जापान) में विज़िटिंग प्रोफ़ेसर समीक्षा के क्षेत्र में लेखक के अन्य उल्लेखनीय प्रकाशन, 'ड्राइडन के आलोचना सिद्धान्त' (1994), 'टी.एस. इलियट : रचना-संघर्ष और सामाजिक समीक्षा' (2005), 'साहित्य इतिहास और आधुनिक बोध' (सम्पा-2004) प्रकाशनाधीन, 'नवजागरणकालीन हिन्दी पत्रकारिता और भारत' (सम्पा.)।
गजानन माधव मुक्तिबोध –
मुक्तिबोध का जन्म 13 नवम्बर, 1917 को श्योपुर (ग्वालियर में हुआ था और निधन 11 सितम्बर, 1964 को दिल्ली में हुआ। वैदिक अध्ययन और परम्परावाले महाराष्ट्रीय परिवार में जन्मे मुक्तिबोध की गृहभाषा मराठी थी, लेकिन अपनी सृजनात्मक अभिव्यक्ति के लिए उन्होंने हिन्दी को चुना। शिक्षा अर्जित करने के उद्देश्य से वे उज्जैन, इन्दौर और नागपुर में रहे। नागपुर विश्वविद्यालय से उन्होंने एम.ए. किया।
मुक्तिबोध अपनी केवल दो प्रकाशित पुस्तकें ही देख सके- 'नयी कविता का आत्मसंघर्ष और अन्य निबन्ध' तथा 'कामायनी : एक पुनर्विचार'। उनकी मृत्यु के बाद ही उनकी अन्य रचनाओं के प्रकाशन का सिलसिला चला। मृत्यु पूर्व छपी दो समीक्षात्मक पुस्तकों के अलावा उनकी प्रकाशित पुस्तकें इस प्रकार हैं- चाँद का टेढ़ा है, भूरी-भूरी ख़ाक धूल (कविता); एक साहित्यिक की डायरी, काठ का सपना, सतह से उठता आदमी (कहानी) विपात्र (उपन्यास) कवि के रूप में अज्ञेय द्वारा सम्पादित 'तारसप्तक' के माध्यम से मुक्तिबोध को महत्त्वपूर्ण दर्जा मिला। 'चाँद का मुँह टेढ़ा है' कविता संग्रह में संकलित उनकी 'अँधेरे में' कविता जन इतिहास का ऐतिहासिक दस्तावेज़ कहलायी।

"

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