| नयी उर्दू ग़ज़ल – पुस्तक नयी पाकिस्तानी नज़्म-नये दस्तख़्त आठवें दशक में लिखी जाने वाली पाकिस्तानी कविताओं का चयन है, जिसे सम्भव किया है, गुलाम हुसैन साजिद ने। स्पष्ट है, इसमें विभाजन पश्चात् पैदा हुई पीढ़ी की सृजनधर्मिता व्यापक स्वरूप में सामने आती है। विशेषकर यहाँ उन शायरों से हमारा साबक़ा होता है, जिन्होंने आठवें दशक में अपना काव्य-संसार रचा है और शायरी को शाइस्तगी के साथ तेज़-तर्रार लबो लहजा बख़्शा है। इन कवियों ने ऐसे समकाल में शायरी को अपने ख़ूने-जिगर से सींचा है, जब पाकिस्तान में राजनीतिक अराजकता चरम पर थी और आम नागरिक आर्थिक और सामाजिक मोर्चे पर संघर्षरत था। अपने समय के सच को पूरी समग्रता में नज़्मों में सँजोने का काम इन शायरों ने बेख़ौफ़ और बख़ूबी किया है। |












