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Mukhaute Ka Rajdharam (मुखौटे का राजधर्म)

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“पुस्तक – मुखौटे का राजधर्म –
जब सदी करवट लेती है तो अरबों लोग उसके गवाह बनते हैं लेकिन उसमें से चन्द लोग ही उस बदलाव की आहट को महसूस करते हैं। जब वक़्त बदलता है तो बदलते वक़्त को पकड़ने और उसके हिसाब से फैसले लेने वाला ही अपनी अलग पहचान बनाता है क्योंकि बदलाव यकायक नहीं होता है, सालों लग जाते हैं। दिनकर ने कहा भी है कि विद्रोह क्रान्ति या बगावत कोई ऐसी चीज़ नहीं जिसका विस्फोट अचानक होता है। घाव भी फूटने के पहले अनेक काल तक पकते रहते हैं। एक पत्रकार के तौर पर आशुतोष ने देश की राजनीति और समाज में आ रहे बदलाव की आहट को ना केवल सुना बल्कि अपनी लेखनी के माध्यम से उसको देश के विशाल पाठक वर्ग के सामने भी रखा। बदलाव की आहट को भाँपने और बदलते वक़्त की नब्ज़ को पकड़ने की आशुतोष की कोशिशों का ही नतीजा है- ‘मुखौटे का राजधर्म’। पत्रकार और सम्पादक के तौर पर आशुतोष ने बहुत बेबाकी और निर्भीकता के साथ अपनी राय रखी। लम्बे समय तक टेलीविज़न में काम करते हुए उनकी भाषा में जो रवानगी दिखाई देती है वह अद्भुत है। राजनीति के लेखों में विश्व सिनेमा से लेकर भारतीय मिथकों का प्रयोग हिन्दी में तो विरले ही दिखाई देता है यह किताब पाठकों को इक्कीसवीं सदी के भारत के बदलाव को देखने और महसूस करने का अवसर देती है।

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Ashutosh (आशुतोष )

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

660

Year/Edtion

2015

Subject

Politics / Journalish / Sociology

Contents

N/A

About Athor

"लेखक – आशुतोष –
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए. और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से एम.फिल. करने के बाद आशुतोष पत्रकारिता से जुड़े। अख़बार की दुनिया से होते हुए वह टीवी में पहुँचे और टीवी न्यूज में क्रान्तिकारी बदलाव लाने वाली आजतक की टीम के एक अहम सदस्य रहे। 2006 में आशुतोष ने बतौर मैनेजिंग एडिटर आईबीएन7 की कमान सँभाली। टीवी के निहायत चर्चित चेहरे होने के साथ देश के अति महत्त्वपूर्ण सम्पादकों में उनका शुमार होता था।
इस दौरान उन्होंने लेखन से अपना रिश्ता बनाये रखा और नियमित रूप से लिखते रहे। इसमें दैनिक हिन्दुस्तान और दैनिक भास्कर के लिए लिखे गये उनके स्तम्भ लेख उल्लेखनीय हैं।
2014 में आशुतोष आम आदमी पार्टी से जुड़कर सक्रिय राजनीति का हिस्सा बने। उनकी पिछली किताब, 'अन्ना क्रान्ति' 2012 में प्रकाशित हुई थी।
"

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