“मोक्ष के मूल की यात्रा –
फ्रीडरिष मैक्स म्युलर : जीवन और कृत्य
जर्मन भारत शास्त्री, भाषा वैज्ञानिक व धर्मशास्त्र के अनुसन्धानकर्ता फ्रीडरिष मैक्स म्युलर (1823-1900) का सम्पूर्ण जीवन हिन्दू धर्म व भारत के मिथकों व उसकी भाषाओं के स्रोतों की अथक खोज को समर्पित था। जर्मनी में आज वे सिर्फ़ प्राच्यविदों के बीच जाने जाते हैं, लेकिन भारत में वे सबसे परिचित जर्मन विद्वान हैं। जर्मन संस्कृति के प्रसार के लिए बनी संस्था गोएठे संस्थान को भारत में मैक्स म्युलर भवन का नाम दिया गया है। मैक्स म्युलर कभी भारत नहीं आ सके, लेकिन भारत का प्राचीन जगत सदैव उनके मानस में छाया रहा।
”
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Moksh Ke Mool Ki Yaatra (मोक्ष के मूल की यात्रा )
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“मोक्ष के मूल की यात्रा –
फ्रीडरिष मैक्स म्युलर : जीवन और कृत्य
जर्मन भारत शास्त्री, भाषा वैज्ञानिक व धर्मशास्त्र के अनुसन्धानकर्ता फ्रीडरिष मैक्स म्युलर (1823-1900) का सम्पूर्ण जीवन हिन्दू धर्म व भारत के मिथकों व उसकी भाषाओं के स्रोतों की अथक खोज को समर्पित था। जर्मनी में आज वे सिर्फ़ प्राच्यविदों के बीच जाने जाते हैं, लेकिन भारत में वे सबसे परिचित जर्मन विद्वान हैं। जर्मन संस्कृति के प्रसार के लिए बनी संस्था गोएठे संस्थान को भारत में मैक्स म्युलर भवन का नाम दिया गया है। मैक्स म्युलर कभी भारत नहीं आ सके, लेकिन भारत का प्राचीन जगत सदैव उनके मानस में छाया रहा।
”
| author | Dr. Friedemann Schlender (डॉ. फ़्रीडमन्न श्लेन्दर) |
|---|---|
| publisher | Vani Prakashan |
| language | Hindi |
| pages | 104 |












