“मै भी सोचूँ तू भी सोच –
एक मित्र ने पूछा,
“”हुल्लड़ जी
फ्रीडम फाइटर्स को तो
अपने देश से बहुत प्यार है
उनके बारे में आपका क्या विचार है”” मैंने कहा ज़्यादातर
सियासत की बाढ़ में बह गये हैं
फ्रीडम फाइटर्स में से
फ्रीडम शब्द तो ग़ायब हो गया है
अब तो सिर्फ़
कुर्सी के लिए
लड़ने वाले फाइटर्स
रह गये हैं।
”
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Main Bhi Sochoon Too Bhi Soch (मैं भी सोचूँ तू भी सोच )
₹150.00
“मै भी सोचूँ तू भी सोच –
एक मित्र ने पूछा,
“”हुल्लड़ जी
फ्रीडम फाइटर्स को तो
अपने देश से बहुत प्यार है
उनके बारे में आपका क्या विचार है”” मैंने कहा ज़्यादातर
सियासत की बाढ़ में बह गये हैं
फ्रीडम फाइटर्स में से
फ्रीडम शब्द तो ग़ायब हो गया है
अब तो सिर्फ़
कुर्सी के लिए
लड़ने वाले फाइटर्स
रह गये हैं।
”
| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Hullad Muradabadi (हुल्लड़ मुरादाबादी ) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 100 |
| Year/Edtion | 2012 |
| Subject | Ghazal |
| Contents | N/A |
| About Athor | "हुल्लड़ मुरादाबादी – नाम : सुशील कुमार चड्डा उपनाम : हुल्लड़ मुरादाबादी तथा गम्भीर लेखन में 'सब्र'। सन् 1962 से हिन्दी काव्य मंच पर। प्रकाशित : पुस्तकालय संस्करण : 'हुल्लड़ का हुल्लड़', 'तथाकथित भगवानों के नाम' (पुरस्कृत), 'सत्य की साधना', 'हज्जाम की हजामत', 'त्रिवेणी', 'इतनी ऊँची मत छोड़ो' (ग़ज़ल संकलन), ये अन्दर की बात है', 'दुमदार और दमदार दोहे', 'क्या करेगी चाँदनी', 'अच्छा है पर कभी-कभी' आदि। कवि सम्मेलनीय विदेश यात्राएँ : अमेरिका तीन बार- 1994, 1996 तथा 1997- में, हांगकांग दो बार तथा बैंकाक, कनाडा तथा आस्ट्रेलिया व 1998 में लन्दन, मैनचेस्टर तथा बर्मिंघम। अभिनय : फ़िल्म 'बंधन बाँहों का' (राजकिरण, स्वप्ना) 'सन्तोष' तथा आई. एस. जौहर कृत फ़िल्म 'नसबंदी' में टाइटिल सांग। पुरस्कार : 'काका हाथरसी पुरस्कार', 'कलाश्री', 'ठिठोली', 'टी.ओ.वाई.पी. पुरस्कार', 'महाकवि निराला सम्मान'। 1997 तथा 1998 में माध्यम संस्थान लखनऊ द्वारा इक्कीस हज़ार का 'अट्टहास शिखर सम्मान'। " |
















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