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Kunwar Narayan : Sansar-1 (कुँवर नारायण : संसार-1)

Original price was: ₹500.00.Current price is: ₹325.00.

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“कुँवर नारायण संसार-1 –
वरिष्ठ कवि कुँवर नारायण की रचनात्मक यात्रा में पूरे पाँच दशकों का समय समाया हुआ है। यह देखना महत्त्वपूर्ण है कि एक ऐसा कवि, आलोचक, जिसकी सारी रचना-प्रक्रिया आदमी को बेहतर और मनुष्यतर बनाने में रही हो, की कविताएँ, कहानियाँ और विविध आलोचना कर्म हमें आधी सदी का लम्बा अन्तराल पूरा करके सुलभ हुए हैं। भाषा और अनुभव की विविधता, अभिव्यक्ति की सादगी, उदात्त मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा एवं रिश्तों की सहजता से कुँवर नारायण का रचना संसार समृद्ध होता है।
यह पुस्तक ‘कुँवर नारायण : संसार’ उनके अब तक के सृजन से एक चयन है; जिसमें कविताओं, कहानियों की वैचारिक दुनिया के साथ आलोचना, कलाओं तथा पर समय-समय पर रचनाकार के द्वारा लिखी गई सार्थक टिप्पणियाँ संकलित हैं। यह चयन एक रचनाकार को नजदीक से देखने-परखने का अवसर प्रदान करता है। इन दुर्लभ निर्मितियों से कुँवर नारायण का रचना संसार बृहत्तर होता है और मनुष्य को पूरी आत्मीयता के साथ संलाप का निमन्त्रण देता है।
अन्तिम पृष्ठ आवरण –
‘अपने सामने’ की कविताओं का रचनाकार एक परिपक्व और अपनी जगह दृढ़ व्यक्ति है। वह अकेला है, जैसा हर सम्वेदनशील बुद्धिजीवी को होना चाहिए। वह इतना सुरक्षित नहीं है, कि सारे संसार के अनुकूल हो जाये और इतना आत्मविश्वासहीन भी नहीं है कि भयातुर होकर चीखने लगे। -रघुवीर सहाय

कुँवर नारायण की कविता को पढ़कर जो निकलता है, वो परेशाँ ही निकलता है। उससे निकलकर चैन, शान्ति, सुख, सन्तोष जैसी भावनाएँ बनाये रखना कठिन है। यह कविता मानसिक द्वन्द्व को आत्मसात करने का निमन्त्रण है। -गिरधर राठी

कवि कुँवर नारायण ने अपना एक शिल्प विकसित कर लिया है, जिसमें कहने की सादगी, सम्वेदना की तीव्रता, रंगों की गहराई और ख़यालों की लकीरें साफ़ उभर कर आती हैं। फलतः न केवल आत्म पक्ष का, वरन् वाह्य पक्ष का भी चित्रण हो जाता है। -मुक्तिबोध

कुँवर नारायण के बिम्ब उनके कवि व्यक्तित्व के ‘डाइनेमिक’ आशयों की उपज हैं, यद्यपि उनका वाह्य रूपाकार तीव्र ऐन्द्रिय बौधों का रूपचित्र प्रस्तुत करता है। ….कुँवर नारायण के बिम्ब बौद्धिक भाव-संवेगों के रूप हैं। -मलयज

Kunwar Narain is a lonely poet and many of the poems of his first collection, Chakravyuh, are deeply imbued with the spirit of quest for a faith in a world of disintegrating values. -Nirmal Verma

आत्मजयी में नचिकेता का प्रश्न वस्तुतः दो पीढ़ियों का प्रश्न है। इस किताब ने मुझमें एक गहरी आस्था और लम्बी पारी खेलने का संकल्प पैदा किया। हिन्दी के जीवित कवियों में कुँवर नारायण सबसे बड़े हैं। जब मैं छटपटाता हूँ तो इनकी कविताएँ पढ़कर बल मिलता है। -राम गोपाल बजाज

I did like the poems. Your way of saying things in undertones is remarkably communicative. And there is a rare suavity in this way of communication. -Sombhu Mitra

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Yatindra Mishr (यतीन्द्र मिश्र)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

501

Year/Edtion

2012

Subject

Collection of Poem

Contents

N/A

About Athor

"यतीन्द्र मिश्र –
हिन्दी कवि, सम्पादक, संगीत और सिनेमा अध्येता हैं। अब तक चार कविता-संग्रह- 'यदा-कदा', 'अयोध्या तथा अन्य कविताएँ', 'ड्योढ़ी पर आलाप' और 'विभास'; शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी पर 'गिरिजा', नृत्यांगना सोनल मानसिंह से संवाद पर 'देवप्रिया', शहनाई उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ के जीवन व संगीत पर ‘सुर की बारादरी', पार्श्वगायिका लता मंगेशकर की संगीत-यात्रा पर ‘लता : सुर-गाथा' तथा बेग़म अख़्तर के जीवन और गायकी पर आधारित ‘अख़्तरी : सोज़ और साज़ का अफ़साना’ प्रकाशित। प्रदर्शनकारी कलाओं पर 'विस्मय का बखान', कन्नड़ शैव कवयित्री अक्क महादेवी के वचनों का हिन्दी में पुनर्लेखन 'भैरवी', हिन्दी सिनेमा के सौ वर्षों के संगीत पर 'हमसफ़र' विशेष चर्चित। फ़िल्म निर्देशक व गीतकार गुलज़ार की कविताओं और गीतों के चयन क्रमशः ‘यार जुलाहे' तथा 'मीलों से दिन' तथा अवध की संस्कृति पर आधारित गज़ेटियर 'शहरनामा : फ़ैज़ाबाद' सम्पादित पुस्तकें हैं। 'गिरिजा', 'विभास' तथा ‘अख़्तरी : सोज़ और साज़ का अफ़साना’ का अंग्रेज़ी, ‘यार जुलाहे' और ‘मीलों से दिन' का उर्दू तथा अयोध्या श्रृंखला कविताओं का जर्मन अनुवाद प्रकाशित। इनके अतिरिक्त वरिष्ठ रचनाकारों अज्ञेय, कुँवर नारायण और अशोक वाजपेयी पर पुस्तकें सम्पादित। राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार 'स्वर्ण कमल', मॉमी फ़िल्म पुरस्कार, शमशेर सम्मान, रज़ा सम्मान, भारतीय भाषा परिषद युवा पुरस्कार, स्पन्दन ललित कला सम्मान, द्वारका प्रसाद अग्रवाल भास्कर युवा पुरस्कार, एच. के. त्रिवेदी स्मृति युवा पत्रकारिता पुरस्कार, महाराणा मेवाड़ सम्मान, हेमन्त स्मृति कविता पुरस्कार, भारत भूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित। भारतीय ज्ञानपीठ फेलोशिप, संस्कृति मन्त्रालय, भारत सरकार की कनिष्ठ शोध-वृत्ति और सराय, नयी दिल्ली की स्वतन्त्र शोध-वृत्ति प्राप्त हैं। दूरदर्शन (प्रसार भारती) के कला-संस्कृति के चैनल डी. डी. भारती के सलाहकार के रूप में कार्यरत (2014-2016)। साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों हेतु भारत के प्रमुख नगरों समेत अमेरिका, इंग्लैण्ड, मॉरीशस और अबु-धाबी की यात्राएँ। कला मूर्धन्यों से संवाद पर आधारित आयोजन ‘संगत' (लखनऊ) के आयोजक-परिकल्पनाकार। अयोध्या में रहते हुए 'विमला देवी फाउण्डेशन न्यास' के माध्यम से सांस्कृतिक गतिविधियों के संचालक।

कुँवर नारायण –
जन्म : 19 सितम्बर, 1927, उत्तर प्रदेश। लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में एम.ए.। लेखन की शुरुआत कविता से, पर साथ ही चिन्तनपरक लेख, साहित्य समीक्षा, कहानियाँ, विभिन्न कलाओं पर लेख आदि लिखते रहे हैं। अनेक पत्रिकाओं के सम्पादन से सम्बद्ध रहे, जिनमें 'युगचेतना', 'नया प्रतीक' और 'छायानट' प्रमुख हैं। लखनऊ के 'भारतेन्दु नाट्य केन्द्र' के अध्यक्ष तथा 'उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादेमी के उपाध्यक्ष रहे।
प्रकाशित कृतियाँ : पहला काव्य संग्रह 'चक्रव्यूह' 1956 में प्रकाशित। अन्य कविता संग्रह-'परिवेश हम तुम', 'अपने सामने', 'कोई दूसरा नहीं' तथा 'इन दिनों'। 'आकारों के आस-पास (कहानी संग्रह), 'आज और आज से पहले (समीक्षा) तथा मेरे साक्षात्कार अनेक विदेशी कवियों का हिन्दी में अनुवाद, जिनमें कवाफी तथा बोर्सेस के अनुवाद परिपत्र प्रकाशित। 'आत्मजयी' तथा 'कोई दूसरा नहीं का इतालवी अनुवाद रोम से प्रकाशित।
अनेक पुरस्कारों से सम्मानित-साहित्य अकादेमी पुरस्कार, कुमारन आशन् पुरस्कार, व्यास सम्मान, शतदल पुरस्कार, प्रेमचन्द पुरस्कार, लोहिया अतिविशिष्ट सम्मान, तुलसी पुरस्कार, हिन्दुस्तानी अकादेमी पुरस्कार तथा कबीर सम्मान। अनेक विदेश यात्राएँ तथा वहाँ साहित्यिक सेमिनारों में भागीदारी व काव्यपाठ। इन दिनों पत्नी भारती तथा पुत्र अपूर्व के साथ दिल्ली में रहते हैं।
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