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Koormanchali Ki Kavitayen (कूर्मांचली की कविताएँ)

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“आओ सुनें चुपचाप चिड़िया का गान !

“काफल पाको त्वील नी चाखो”” की मधुर तान !

सुनें उसे बस और कुछ न सुनें,

कुछ न करें, बस सुनें सुनें,

सुनते रहें चुपचाप !

न गिनें कि जंगल में देवदारु कितने हैं?

कितने बाँज ? चीड़ कितने हैं?

न सुनें वायु का रुदन

झरनों की छल छल कल कल

पत्तों की सर सर खर खर

झींगुरों की झिंग झनन झनन !

कुछ न करें बस लेटे रहें

सुनते रहें चिड़िया का गान

“काफल पाको त्वील नी चाखो”” की मधुर तान

पास पास घास पर

जब तक अनायास ही

हमारे होंठों से प्यास किसी पिछले जीवन की न फूट पड़े बन

“काफल पाको मील नी चाखो”” की मधुर तान !”

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Manohar Shyam Joshi (मनोहर श्याम जोशी)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

122

Year/Edtion

2013

Subject

Collection of Poetry

Contents

N/A

About Athor

"मनोहर श्याम जोशी

9 अगस्त, 1933 को अजमेर में जन्मे, लखनऊ विश्वविद्यालय के विज्ञान स्नातक मनोहर श्याम जोशी 'कल के वैज्ञानिक' की उपाधि पाने के बावजूद रोजी-रोटी की खातिर छात्र जीवन से ही लेखक और पत्रकार बन गये। अमृतलाल नागर और अज्ञेय इन दो आचार्यों का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त हुआ। स्कूल मास्टरी, क्लर्की और बेरोजगारी के अनुभव बटोरने के बाद अपने 21वें वर्ष से वह पूरी तरह मसिजीवी बन गये।

प्रेस, रेडियो, टी.वी., वृत्तचित्र, फिल्म, विज्ञापन-सम्प्रेषण का ऐसा कोई माध्यम नहीं जिसके लिए उन्होंने सफलतापूर्वक लेखन-कार्य न किया हो। खेल-कूद से लेकर दर्शनशास्त्र तक ऐसा कोई विषय नहीं जिस पर उन्होंने कलम न उठाई हो । आलसीपन और आत्मसंशय उन्हें रचनाएँ पूरी कर डालने और छपवाने से हमेशा रोकता चला आया है। पहली कहानी तब छपी थी जब वह अठारह वर्ष के थे लेकिन पहली बड़ी साहित्यिक कृति प्रकाशित करवाई जब सैंतालीस वर्ष के होने आये।

केन्द्रीय सूचना सेवा और टाइम्स ऑफ इंडिया समूह से होते हुए सन् 1967 में हिन्दुस्तान टाइम्स प्रकाशन में साप्ताहिक हिन्दुस्तान के सम्पादक बने और वहीं एक अंग्रेजी साप्ताहिक का भी सम्पादन किया। टेलीविजन धारावाहिक 'हम लोग' लिखने के लिए सन् 1984 में सम्पादक की कुर्सी छोड़ दी और तब से स्वतन्त्र लेखन करते रहे ।
निधन: 30 मार्च 2006"

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