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Kaviyon Ke Patra (कवियों के पत्र)

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“कवियों के पत्र –
हमारे समय के बड़े आलोचक डॉ. रामविलास शर्मा ने जहाँ इतिहास को कला-संस्कृति इतिहास को देखने की नयी दृष्टि प्रदान की, वहीं हिन्दी लेखन की कई पीढ़ियों के साहित्य को गहरे प्रभावित किया। आलोचना में तो उनके योगदान से शायद ही कोई अपरिचित है।

तमाम सहमति-असहमति के बावजूद, ख़ासकर आधुनिक कवि इस महान् आलोचक से प्रेरणा ग्रहण करते रहे हैं। पक्ष या प्रतिपक्ष में ही सही रामविलास जी से उनके आत्मीय और घनिष्ठ सम्बन्ध इस तथ्य को प्रकट करते हैं।

रामविलास शर्मा को लिखे कवियों के पत्र इस सच का साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं कि कवियों पर उनकी बात का असर कितना गहरा पड़ा है। बिना किसी पूर्वागृह के अपनी बात रखने की यह आलोचनाशैली पहले भी अपना उदाहरण स्वयं थी। अब तो ख़ैर कहीं और उसका शतांश मिलना भी विरल है।

यह पत्र साहित्य जहाँ पत्र लेखन जैसी गौण साहित्य-विधा को महत्त्व देता है वहीं दूसरी ओर यह सूत्र भी थमाता है कि लेखकों के पत्रोत्तर दरअसल साहित्य के इतिहास के लिए प्रामाणिक स्रोत हैं।

लेखन के पर्यावरण, लेखकों के परस्पर सम्बन्ध और उनकी रचनात्मक जिजीविषा का पता भी पत्रों से बेहतर और कोई नहीं दे सकता। आचार-व्यवहार में आमतौर पर कम खुलनेवाले लेखक भी पत्रों में अपने आन्तरिक सच को बेलाग व्यक्त कर देते हैं। रामविलास जी की विश भूमिका के साथ ही कवियों को लिखे उनके पत्र इस किताब के अन्य उल्लेखनीय पक्ष हैं।

लेखकों की पारिवारिक-सामाजिक भूमिका के साथ ही उनके व्यक्तित्व के अनेक अनखुले पृष्ठ भी यह किताब खोलती है। इस नज़र आलोचना की नयी प्रविधि भी प्रस्तुत होती है।

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Dr. Ramvilas Sharma (डॉ. रामविलास शर्मा)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

276

Year/Edtion

2012

Subject

Letters

Contents

N/A

About Athor

"डॉ. रामविलास शर्मा –
वाणी से प्रकाशित कृतियाँ
आलोचना –
इतिहास दर्शन
लोकजागरण और प्रगतिशील साहित्य
मार्क्सवाद और प्रगतिशील साहित्य
रूपतरंग और प्रगतिशील कविता की वैचारिक पृष्ठभूमि
भारतीय साहित्य के इतिहास की समस्याएँ
भाषा युगबोध और कविता
कथा विवेचना और गद्यशिल्प
सामाजिक, राजनैतिक व ऐतिहासिक कृति –

गाँधी अम्बेडकर लोहिया व इतिहास की
समाजशास्त्र, इतिहास – मानव सभ्यता का विकास
उपन्यास – चार दिन
नाटक – पाप के पुजारी
कविता संग्रह – सदियों के सोये जाग उठे, बुद्ध वैराग्य तथा प्रारम्भिक कविताएँ।
कवियों के पत्र – पत्र – तीन महारथियों के पत्र
संस्मरण – बड़े भाई
पारिवारिक गद्य – जहाज़ और तूफ़ान
निबन्ध – विराम चिन्ह

'निराला की साहित्य साधना' पुस्तक पर 'साहित्य अकादेमी पुरस्कार' प्राप्त। इसके अतिरिक्त 1988 में 'श्लाका सम्मान', 1990 में 'भारत-भारती पुरस्कार' और 1991 में 'व्यास सम्मान' से सम्मानित सन् 2000 में हिन्दी अकादेमी दिल्ली सरकार द्वारा सर्वोच्च सहस्राब्दी सम्मान से सम्मानित। लेकिन इन पुरस्कारों की राशि को देश में साक्षरता के प्रसार में दान।
"

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