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Kashmir Ka Bhavishya (कश्मीर का भविष्य )

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“कश्मीर का भविष्य –
भारत में कश्मीर पर कोई भी राजनीतिक किताब लिखना या सम्पादित करना जोख़िम से भरा काम है। पंजाब समस्या पर, झारखंड की माँग पर और यहाँ तक कि उत्तर-पूर्व भारत में विद्रोह की स्थिति पर किताब तैयार की जा सकती है। कोई आपको राष्ट्रद्रोही नहीं कहेगा। लेकिन कश्मीर पर वस्तुपरक ढंग से कुछ भी लिखने से यह विशेषण बहुत आसानी से आमन्त्रित किया जा सकता है। यही कारण है कि भारत में कश्मीर पर अभी तक जो भी पुस्तकें लिखी या सम्पादित की गयी हैं, वे मुख्यतः ‘राष्ट्रवादी’ क़िस्म की हैं। उनमें कश्मीर के असन्तोष पर विचार ज़रूर किया गया है, किन्तु मूल प्रतिज्ञा यह है कि कश्मीर हमारा है और हमारा ही रहेगा- इसकी क़ीमत जो भी हो। ऐसी किताबें विरल हैं, जो कश्मीर की समस्या को कश्मीरियों की निगाह से भी देखती हों। ऐसी अच्छी किताब शायद कोई कश्मीरी ही लिख सकता है। लेकिन कश्मीरी को इस समय कलम नहीं, बन्दूक़ ज़्यादा आकर्षित कर रही है। अभी हाल तक कश्मीर का पक्ष देख पाना इसलिए भी कठिन था, क्योंकि कश्मीर की आज़ादी की माँग बहुत बुलन्द नहीं थी। अब यह आवाज़ कश्मीर की घाटी में ही नहीं, दूर-दूर तक सुनी जा सकती है। स्थिति में गुणात्मक परिवर्तन आ चुका है। अतः नये विचारों की ज़रूरत है। यह पुस्तक इसी दिशा में एक विनम्र प्रयास है। कश्मीर भारतीय राजनीति की एक महत्त्वपूर्ण कसौटी है, अतः इसके आईने में हम भारत के राजनीतिक चरित्र की भी वस्तुपरक जाँच कर सकते हैं।

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Rajkishor (राजकिशोर)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

164

Year/Edtion

2011

Subject

Aaj Ke Prashan

Contents

N/A

About Athor

"राजकिशोर –
जन्म: 2 जनवरी 1947 को कलकत्ता में।
शिक्षा : कलकत्ता विश्वविद्यालय से एम. ए. (हिन्दी),
एल. एल. बी. तथा बी. कॉम. (ऑनर्स)।
पत्रकारिता की शुरुआत अगस्त 1977 में आनन्द बाजार पत्रिका समूह, कलकत्ता द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक 'रविवार' से। 1986-87 में साप्ताहिक 'परिवर्तन' का सम्पादन किया। 1987 से 1990 तक 'रविवार' के संयुक्त सम्पादक। 1990 1996 तक नवभारत टाइम्स, दिल्ली में वरिष्ठ सहायक संपादक। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में हजारों लेख प्रकाशित हो चुके हैं। मुख्यतः राजनीति, समाज एवं आर्थिक विषयों पर लेखन। संप्रति प्रेस इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया की त्रैमासिक पत्रिका 'विदुर' के संयुक्त सम्पादक।
प्रकाशन : पत्रकारिता के परिप्रेक्ष्य, आज़ादी एक अधूरा शब्द है, स्त्री-पुरुष : कुछ पुनर्विचार, धर्म, साम्प्रदायिकता और राजनीति, हिन्दी लेखक और उसका समाज, उदारीकरण की राजनीति तथा तुम्हारा सुख (उपन्यास) ।
सम्पादन : समकालीन पत्रकारिता मूल्यांकन और मुद्दे । सह-सम्पादन: मुसलमान क्या सोचते हैं। लोकप्रिय पुस्तक शृंखला 'आज के प्रश्न' के सम्पादक, जिसके अंतर्गत अब तक 13 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
पुरस्कार और सम्मान : पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए 1988 में लोहिया पुरस्कार, 1990 में हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा साहित्यकार सम्मान तथा 1995 में बिहार राष्ट्रभाषा परिषद, बिहार द्वारा राजेन्द्र माथुर पत्रकारिता पुरस्कार। 1996 में मध्य प्रदेश सरकार की राजेन्द्र माथुर पत्रकारिता फेलोशिप।
"

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