“कबीर का मोहल्ला –
शहर का नाम छोड़ देता हूँ, लेकिन मोहल्ले का नाम आपको बता दूँ यह है कबीरगंज मोहल्ला। यह बताता चलूँ कि यह जैसा मोहल्ला है, वैसा मोहल्ला गंगा-जमुनी तहज़ीब वाले वतन के कई शहरों में आपको देखने को मिल जायेंगे। कोई अजूबा नहीं है ये मोहल्ला। इस मोहल्ले में गली की एक तरफ़ के अधिकतर मकान हिन्दुओं के और दूसरी तरफ़ मुसलमानों के हैं। आप जानते ही हैं, ऐसे मोहल्ले जहाँ हिन्दू-मुस्लिम दोनों की आबादी लगभग बराबरी पर हो, तो सिर्फ़ वह मोहल्ला ही क्यों, आस-पास का इलाका भी संवेदनशील हो जाता है। इसलिए सरकार ने इस मोहल्ले को सम्वेदनशील घोषित कर रखा है।
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