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जंगल गाथा –
परमू कहता है कि जंगल का बघेश्वर देवता तो ख़ुद साहब बहादुर हैं। घने जंगल से घिरी अंग्रेज़ी के ज़माने की इस विशाल कोठी में बाप-दादाओं के ज़माने से रहते हुए ख़ुद साहब के भीतर एक विशाल जंगल उग आया है। ये जंगल शाश्वत है जो कटता रहता है और नये जंगल उगते-फैलते जाते हैं, साहब बहादुर के भीतर- उनकी जिन्दगियों में वीरभद्र साहब एक विशाल घना जंगल समेटे हैं अपने भीतर। साहब बहादुर निकल नहीं सकते इस जंगल से। परमू सब जानता है। साहब का आदमी है वह। बहुत मुँहलगा है इसलिए डरता नहीं वह उनसे। उनके जंगल से भी नहीं डरता।- पुस्तक अंश
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| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Namita Singh (नमिता सिंह ) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 142 |
| Year/Edtion | 2012 |
| Subject | Stories |
| Contents | N/A |
| About Athor | "नमिता सिंह – " |














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