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Jhund Se Bichura (झुंड से बिछुड़ा)

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झुण्ड से बिछुड़ा – प्रसिद्ध कथाकार विद्यासागर नौटियाल का उपन्यास ‘झुण्ड से बिछुड़ा’ पर्वतीय जन-जीवन की त्रासदी को बड़े ही विश्वसनीय ढंग से उजागर करता है—विशेषकर गढ़वाली ग्रामीणों के संघर्ष और उनकी अदम्य जिजीविषा को लेखक ने तमाम प्रचलित मिथकों, किंवदन्तियों, रूढ़ियों, अन्धविश्वासों को सामने रखते हुए एक नयी कथाशैली और प्रविधि के साथ उपन्यास में प्रस्तुत किया है, जो अपने आप में नये जीवन के द्वार खोलने जैसा है। बेशक ‘झुण्ड से बिछुड़ा’ लघु उपन्यास है लेकिन इसके कथ्य का फलक विस्तृत है। कथा के केन्द्र में जहाँ ‘शान्ति’ जैसी निरुपाय और निस्सहाय एक पहाड़ी महिला है, जिसे अपनी गाय और ‘भोली’ बछड़ी के प्रति अपार वात्सल्य है तो दूसरी ओर है एक भयानक बाघ, जिसके रूप में मानो काल ही जंगल में घूमता रहता है। उपन्यास में मुख्य कहानी के इर्द-गिर्द फैला पहाड़ी जीवन ही नहीं, बाघ के आतंक से लोगों को सुरक्षा देते पात्रों का दुर्दम्य साहस भी चित्रित है। वहाँ के आम जीवन में बाघ एक पहाड़ी मिथक भी है और हक़ीक़त भी। श्रीधर प्रसाद जैसे पात्र भी पहाड़ी समाज में बाघ जैसे ही हैं। सत्ता और नौकरशाही के आतंक को जिस तरह उपन्यास की विषयवस्तु के साथ पिरोया गया है उससे यह कृति इस पूरे ताने-बाने का जीवन्त पाठ बन जाती है। भारतीय ज्ञानपीठ ‘झुण्ड से बिछुड़ा’ उपन्यास प्रस्तुत करते हुए आशा करता है कि अपनी यह विषयवस्तु और नये कथाशिल्प से पाठकों को आकर्षित करेगा।

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Vidya Sagar Nautiyal (विद्या सागर नौटियाल)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

108

Year/Edtion

2008

Subject

Novel

Contents

N/A

About Athor

विद्यासागर नौटियाल – जन्म: 29 सितम्बर, 1933 (टिहरी गढ़वाल में, भागीरथी के तट पर बसे मालीदेवल में)। शिक्षा: रियासत के विद्यालयविहीन सुदूर जंगलों में अपने घर पर। बाद में टिहरी, देहरादून तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में। तीस वर्षों तक वकालत। कुछ समय तक सामन्त विरोधी स्वतन्त्रता आन्दोलन में सक्रिय। पहली गिरफ़्तारी 18 अगस्त, 1947 को टिहरी में। 1958 में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन के उदयपुर अधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य रहे। प्रकाशन: 1954 में पहली कहानी 'भैंस का कट्या' कल्पना में प्रकाशित। अब तक 'उलझे रिश्ते', 'भीम अकेला', 'सूरज सबका है' और 'उत्तर बायाँ है' उपन्यास 'मोहन गाता जाएगा' आत्मकथा-अंश तथा 'सुच्ची डोर' कथा संग्रह और 'देशभक्तों की क़ैद में' संस्मरण तथा 'बागी टिहरी' निबन्ध-संग्रह प्रकाशित।

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