“जापान के विविध रंग-राग –
जापानी जीवन, समाज और संस्कृति से जुड़े ये आलेख एवं अनुवाद वस्तुतः भारत-जापान-संवाद का ही एक रूप हैं। भारतीय मिट्टी और हवा में रचे-बसे देशी मन की जापानी समाज, साहित्य और संस्कृति में यह अन्तर्यात्रा एक ओर तो अतीत और वर्तमान के बीच सेतु बनाती रही है दूसरी ओर अपने भारतीय होने के बोध को जाग्रत रखते हुए जापान और भारत के रिश्तों में नयी कड़ियाँ जोड़ती रही है। साहित्य की सजग पाठक और रंग-कलाओं की जागरूक दर्शक होने के कारण मेरे मन में नये-पुराने एशियाई सन्दर्भों की तुलना और सांस्कृतिक-सामाजिक आदान-प्रदान की विवेचना भी लगातार चलती रही है। इस तरह भारत के साथ-साथ जापान भी इन लेखों में मौजूद रहा है।
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| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Ritarani Paliwal (रीतारानी पालीवाल) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 172 |
| Year/Edtion | 2015 |
| Subject | Criticism |
| Contents | N/A |
| About Athor | "प्रोफ़ेसर रीतारानी पालीवाल – जापानी थिएटर (काबुकी, नोह, बुनाराक) का विशेष अध्ययन। जापानी नाटक और रंगमंच, साहित्य और संस्कृति पर हिन्दी में लेखन, जापानी साहित्य से हिन्दी में अनुवाद। प्रकाशित पुस्तकें : हिन्दी एवं अंग्रेज़ी की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में साहित्य, संस्कृति, भाषा सम्बन्धी लेखन। साहित्य, भाषा एवं शिक्षण सम्बन्धी विषयों पर व्याख्यान। पुरस्कार : काव्य लेखन के लिए 'साहित्य कला परिषद' दिल्ली द्वारा पुरस्कृत। अनुवाद के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारतीय अनुवाद परिषद का 'नातालि पुरस्कार'। |















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