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Janta Ke Beech : Janta Ki Baat (जनता के बीच : जनता की बात)

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“नुक्कड़ नाटक के शोध, अध्ययन, अध्यापन और उसकी प्रस्तुति से जुड़ी रहने वाली डॉ. प्रज्ञा द्वारा सम्पादित ‘जनता के बीच जनता की बात’ हिंदी के नुक्कड़ नाटकों की पिछले तीन दशकों की यात्रा के विभिन्न पड़ावों की रचनात्मक प्रस्तुति है। इन तीन दशकों में नुक्कड़ नाटक ने भारतीय समाज में सक्रिय साम्प्रदायिकता, जातिवाद, अशिक्षा, असमानता, शोषण, बेरोज़गारी, युद्ध और हिंसा जैसी अनेक मानव-विरोधी ताकतों का जमकर विरोध किया है और निरंतर यह संदेश दिया है कि यदि समाज को बदलना है तो संगठित होकर संघर्ष करना होगा।

आपात्काल और उसके बाद बनी राजनीतिक-संस्कृति और सामाजिक-समीकरणों के बीच यथास्थितिवाद को तोड़ने और मेहनतकश जनता के लिए एक वैकल्पिक समाज-व्यवस्था का सपना बुनने में नुक्कड़ नाटक एक मज़बूत सांस्कृतिक हथियार रहा है। इसलिए आज एक जनवादी कला माध्यम के रूप में नुक्कड़ नाटक की लोकप्रियता बढ़ी हैं; परंतु यह भी देखने में आया है कि नुक्कड़ नाटक के संग्रहों की संख्या अभी भी कम है। इससे आम धारणा यह बनती है कि नुक्कड़ नाटक तो बिना किसी स्क्रिप्ट्स के बस यों ही इम्प्रोवाइज़ेशन के जरिये तैयार कर लिए जाते हैं। ऐसे में हिंदी क्षेत्र में सक्रिय नाट्य मंडलियों व नुक्कड़ नाटककारों के नाटकों का संग्रह के रूप में प्रकाश में आना एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। अतः यह संग्रह न केवल नुक्कड़ नाटकों के मौलिक स्क्रिप्ट्स उपलब्ध कराता है बल्कि आशा है कि नयी नाट्य संस्थाओं के लिए यह मार्गनिर्देशक का कार्य भी करेगा।

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Pragya (प्रज्ञा)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

208

Year/Edtion

2008

Subject

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Contents

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About Athor

"डॉ. प्रज्ञा

1971 में दिल्ली में जन्म। दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एम. ए., एम. फिल. तथा पीएच. डी. । कथन, पहल, सामयिक वार्त्ता, अभिव्यक्ति, लोकायत, और अनभै सांचा जैसी पत्रिकाओं में साहित्यिक, सामाजिक, वैचारिक लेख और साक्षात्कार । हिंदी के नुक्कड़ नाटकों को विश्लेषित करती पुस्तक 'नुक्कड़ नाटक : रचना और प्रस्तुति' राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एन.एस.डी.), दिल्ली से प्रकाशित 1 एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा अलवर के सामाजिक- सांस्कृतिक महत्त्व को दर्शाती पुस्तक 'तारा की अलवर यात्रा' ।

लगभग दो वर्ष तक दिल्ली से प्रकाशित होने वाली पत्रिका 'समय सूत्रधार' के लिए पत्रकारिता। इसके अतिरिक्त जनसत्ता, राष्ट्रीय सहारा जैसे राष्ट्रीय दैनिक समाचार-पत्रों में नियमित लेखन ।

संचार माध्यमों से बरसों पुराने जुड़ाव के तहत आकाशवाणी और दूरदर्शन के अनेक कार्यक्रमों के लिए लेखन व भागीदारी।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एन.एस.डी.) के सहयोग से दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों के लिए रंगशिविर – 2007 का आयोजन ।

सम्प्रति : दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज के हिंदी विभाग में रीडर के रूप में कार्यरत ।

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