“हिन्दी भाषा –
इस पुस्तक के लिखने में हमने 1901 ईस्वी की मर्दुमशुमारी की रिपोर्टों से, भारत की भाषाओं की जाँच की रिपोर्टों से, नये ‘इम्पीरियल गज़ेटियर्स’ से, और दो एक और किताबों से मदद ली है। पर इसके लिए हम डॉक्टर ग्रियर्सन के सबसे अधिक ऋणी हैं। इस देश की भाषाओं की जाँच का काम जो गवर्नमेंट ने आपको सौंपा था, वह बहुत कुछ हो चुका है। इस जाँच से कितनी ही नयी-नयी बातें मालूम हुई हैं। उनमें से मुख्य मुख्य बातों का समावेश हमने इस निबन्ध में कर दिया है।
अब तक बहुत लोगों का ख़याल था कि हिन्दी की जननी संस्कृत है। यह ठीक नहीं। हिन्दी की उत्पत्ति अपभ्रंश भाषाओं से है और अपभ्रंश भाषाओं की उत्पत्ति प्राकृत से है। प्राकृत अपने पहले की पुरानी बोलचाल की संस्कृत से निकली हैं और परिमार्जित संस्कृत भी (जिसे हम आज कल केवल ‘संस्कृत’ कहते हैं) किसी पुरानी बोलचाल की संस्कृत से निकली है। आज तक की जाँच से यही सिद्ध हुआ है कि वर्तमान हिन्दी की उत्पत्ति ठेठ संस्कृत से नहीं।
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| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Mahavir Prasad Dwivedi (महावीर प्रसाद द्विवेदी ) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 132 |
| Year/Edtion | 2014 |
| Subject | Linguistics |
| Contents | N/A |
| About Athor | "महावीर प्रसाद द्विवेदी – (1864–1938) – " |













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