नूपुर-जमुना-बूबू के पारस्परिक पत्रों के आदान-प्रदान के ज़रिये ‘दो औरतों के पत्र’ नामक यह पत्र-उपन्यास रचा-गढ़ा गया है। मयमनसिंह के ब्राह्मपल्ली से ले कर ढाका के शान्तिबाग़ तक, नयी दिल्ली के पहाड़गंज से ले कर कश्मीर के श्रीनगर तक, इन पत्रों का भूगोल विस्तृत है! गर्भवती जमुना की, अपनी चारों तरफ़ अनन्त घृणा के बीच, नूपुर की ज़ुबानी प्यार के दो बोल सुनने की अदम्य चाह और आन्तरिक गुहार के साथ इस उपन्यास की परिसमाप्ति होती है।
नूपुर-जमुना-बूबू के पारस्परिक पत्रों के आदान-प्रदान के ज़रिये ‘दो औरतों के पत्र’ नामक यह पत्र-उपन्यास रचा-गढ़ा गया है। मयमनसिंह के ब्राह्मपल्ली से ले कर ढाका के शान्तिबाग़ तक, नयी दिल्ली के पहाड़गंज से ले कर कश्मीर के श्रीनगर तक, इन पत्रों का भूगोल विस्तृत है! गर्भवती जमुना की, अपनी चारों तरफ़ अनन्त घृणा के बीच, नूपुर की ज़ुबानी प्यार के दो बोल सुनने की अदम्य चाह और आन्तरिक गुहार के साथ इस उपन्यास की परिसमाप्ति होती है।
| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Taslima Nasrin Translated By Sushil Gupta (तसलीमा नसरीन) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 92 |
| Year/Edtion | 2012 |
| Subject | Social Science |
| Contents | N/A |
| About Athor | "तसलीमा नसरीन ने अनगिनत पुरस्कार और सम्मान अर्जित किए हैं, जिनमें शामिल हैं-मुक्त चिन्तन के लिए यूरोपीय संसद द्वारा प्रदत्त-सखारव पुरस्कार; सहिष्णुता और शान्ति प्रचार के लिए यूनेस्को पुरस्कार; फ्रांस सरकार द्वारा मानवाधिकार पुरस्कार; धार्मिक आतंकवाद के खिलाफ़ संघर्ष के लिए फ्रांस का एडिट द नान्त पुरस्कार; स्वीडन लेखक संघ का टूखोलस्की पुरस्कार; जर्मनी की मानववादी संस्था का अर्विन फिशर पुरस्कार; संयुक्त राष्ट्र का फ्रीडम नाम रिलिजन फ़ाउण्डेशन से फ्री थॉट हीरोइन पुरस्कार और बेल्जियम के मेंट विश्वविद्यालय से सम्मानित डॉक्टरेट! वे अमेरिका की ह्यूमैनिस्ट अकादमी की ह्युमैनिस्ट लॉरिएट हैं। भारत में दो बार, अपने ‘निर्वाचित कलाम' और 'मेरे बचपन के दिन' के लिए वे ‘आनन्द पुरस्कार' से सम्मानित। तसलीमा की पुस्तकें अंग्रेज़ी, फ्रेंच, इतालवी, स्पैनिश, जर्मन समेत दुनिया की तीस भाषाओं में अनूदित हुई हैं। मानववाद, मानवाधिकार, नारी-स्वाधीनता और नास्तिकता जैसे विषयों पर दुनिया के अनगिनत विश्वविद्यालयों के अलावा, इन्होंने विश्वस्तरीय मंचों पर अपने बयान जारी किए हैं। ‘अभिव्यक्ति के अधिकार' के समर्थन में, वे समूची दुनिया में, एक आन्दोलन का नाम बन चुकी हैं। |














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