“राजेश तैलंग, के बड़े भाई, सुधीर तैलंग, ऊँचे दर्जे के आर्टिस्ट थे और एक नामवर कार्टूनिस्ट! मैं उनका प्रशंसक था। राजेश तैलंग भी शौहरत के हाईवे के राहगीर हैं। ख़ूबसूरत कविताएँ लुटाते आगे बढ़ रहे हैं। ये हाईवे शायद चाँद पर पहुँच कर रुके ! “डीयर राजेश, वहीं चाय पर मिलेंगे।’ गुडलक ! -गुलज़ार / राजेश ने कविताओं में जो बातें कही हैं-भोली-भाली, मधुर, सच्ची, लाड़ से मुस्कुराती, बलखाती, मचल-मचल पड़ती, कभी नटखट तो कभी आमन्त्रण भरी या कुल मिलाकर कहें तो एक हक़ीक़त झीनी-झीनी। इनमें संकेत भी हैं और मनुहार भी। बातों को आसानी से कह देना बहुत मुश्किल होता है जो आपके पास पहुँचती हैं, दिल को छू जाती हैं और फिर वहीं ठहर जाती हैं अपनी रसभरी नरम सुगन्ध के साथ। -पीयूष मिश्रा
”

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Chand Pe Chai (चाँद पे चाय )
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| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Rajesh Tailang (राजेश तैलंग ) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 125 |
| Year/Edtion | 2025 |
| Subject | Poetry Collection |
| Contents | N/A |
| About Athor | "राजेश तैलंग एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति हैं परन्तु मूलतः एक अभिनेता के तौर पे जाने जाते हैं। अभिनय वे बचपन से करने लगे और अभिनय को बारीकी से जानने के लिए इन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से विधिवत शिक्षा भी ग्रहण की। अभिनय के साथ-साथ लेखन के प्रति रुझान बढ़ा और अब अभिनय के अलावा कविता, नाट्य लेखन, संवाद लेखन और निर्देशन भी करते रहते हैं। अभिनेता के तौर पे इनकी पहचान शान्ति, मिर्जापुर, देल्ही क्राइम, सिलेक्शन डे, वन्दिश बैंडिट्स, सिद्धार्थ, मुक्काबाज़, सेकेंड बेस्ट एग्जोटिक होटल आदि फ़िल्मों, वेब सीरीज़ से बनी । इन्हें अभिनेता के तौर पे कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया है। इन्होंने ‘थियेटर टाकीज' नाम से एक यूट्यूब चैनल बनाया जिसमें शॉर्ट-फ़िल्म्स, वृत्तचित्र, कहानियों पे एक सीरीज़ 'सुनी अनसुनी' और प्रेम कविताओं पे एक सीरीज़ 'चाँद पे चाय' बनाते रहते हैं। इस पुस्तक में उनकी प्रेम कविताएँ हैं। उनका मानना है- ""प्रेम से बड़ी कोई क्रान्ति नहीं और जिस क्रान्ति का बीज प्रेम न हो वो क्रान्ति किसी काम की नहीं।""" |













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