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बेला मुरझ्यो जमुन कछार – ‘बेला मुरझ्यो जमुन कछार’ कान्ति खरे की कहानियों का संग्रह है जो अब प्रकाशित हो रहा है। कान्ति खरे कवयित्री के रूप में अपनी भावनात्मक तरलता के लिए जानी गयीं और यहाँ उनकी कहानियाँ भी इस तरलता से वंचित नहीं हैं। इन कहानियों के सन्दर्भ फलक भिन्न-भिन्न हैं-कहीं पौराणिक, कहीं ऐतिहासिक, कहीं समसामयिक। पर सबके केन्द्र में है स्त्री, कई युगों की घनीभूत पीड़ा अपने में समाये हुए। सभी कहानियों के सृजन के नाभिदेश में उसके स्त्री होने की यातना अन्तर्भुक्त है। मातृत्व की अनुभूति उस दाहक-शामक की तरह है जो शरीर की धातुओं को राख करके जीने की संजीवनी शक्ति देने में सक्षम है। कान्ति खरे की कहानियाँ पारदर्शी, ईमानदारी और निर्मल संवेदना का साक्ष्य देती हैं। वे पाठक को छूती भिगोती और वेधती चलती है। इन कहानियों की भाषा में जो तरलता है, वह लेखिका के अन्तःउद्वेलन से फूटती है। एक तरह का भीगापन इन कहानियों का सहज प्रकृत गुण है जो अब कहानियों की दुनिया में विरल है। कान्ति खरे के पास एक अपनी भाषा थी-अपनी कथादृष्टि जैसी ही अपनी एक भाषा-दृष्टि। गहरी संवेदनशीलता के बल पर कान्ति खरे ने अपनी विलक्षण पहचान बनायी जिसका असर पाठकों के मन पर बहुत दिनों तक बना रहेगा। |
| author | Kanti Khare (कान्ति खरे) |
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| publisher | Vani Prakashan |
| language | Hindi |
| pages | 100 |














