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Anuprayukt Rajbhasha (अनुप्रयुक्त राजभाषा )

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“अनुप्रयुक्त राजभाषा –
अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बात करें तो अमरीका के राष्ट्रपति ने अपने सुरक्षा अधिकारियों को हिन्दी सीखने के निर्देश दिये हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव ने विश्व हिन्दी सम्मेलन का उद्घाटन हिन्दी वाक्य से किया था। विश्व के सौ से अधिक विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है।
विदेशों में जो छात्र-छात्राएँ पढ़ने के लिए जा रहे हैं, वे सभी, तथा कुछ पढ़ लिखकर वहीं रोज़गार पा जाते हैं तथा कुछ घर भी बना लेते हैं, उन सभी की सम्पर्क भाषा हिन्दी ही रहती है इसलिए आज हिन्दी की उपादेयता बढ़ी है।
लाभप्रदता भी हिन्दी के कारण बढ़ती है क्योंकि हिन्दी का उपभोक्ता वर्ग संसार में सबसे बड़ा है इसलिए राष्ट्रीय व बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भी हिन्दी को अपना रही हैं। हिन्दी के कारण उनकी लाभप्रदता में बढ़ोतरी हुई है।
इस पुस्तक के लिखने की पृष्ठभूमि में प्रयोजन भी यही रहा है कि सभी वर्ग के लोग चाहे वे विद्यार्थी हों, शोधार्थी हों, या फिर हिन्दी में रुचि रखने वाले आमजन उनको इस पुस्तक में एक जगह सभी सामग्री मिल जायेगी। इस पुस्तक में हिन्दी की उत्पत्ति-विकास, इतिहास, काव्यशास्त्र व संघ की भाषा नीति की सामान्य जानकारी दी गयी है। इसके साथ हिन्दी के प्रचार प्रसार से जुड़ी समितियों व संस्थानों की भी जानकारी दी गयी है। सभी वर्गों के लिए ज्ञानवर्द्धक व पठनीय पुस्तक।

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Dr. Manik Mrigesh (डॉ. माणिक मृगेश )

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

152

Year/Edtion

2011

Subject

Linguistics

Contents

N/A

About Athor

"डॉ. माणिक मृगेश –
पिताश्री : स्वर्गीय गणपतिलाल
जन्मस्थान : अलीगढ़ (उ.प्र.)
जन्म तिथि : 1 सितम्बर, 1952
योग्यताएँ : एम. फिल, पीएच.डी. (हिन्दी भाषा विज्ञान), एलएल.बी.।
अनुभव : उ.प्र. विद्युत परिषद, आई.डी.बी.आई. एच.सी.आई. (एअर इंडिया), सिंडीकेट बैंक तथा उ.प्र. में बीडीओ के लिए चयनित (1984)।
मान-सम्मान : 'दैनिक समाचार पत्रों की भाषा' पर सूचना व प्रसारण मंत्रालय द्वारा भारतेन्दु मान पुरस्कार से 1988 में सम्मानित, राजभाषा विभाग द्वारा प्रशंसा पत्र प्रदत, राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी द्वारा सम्मानित।
कृतियाँ : राजभाषा विविधा, समाचार पत्रों की भाषा, भूमंडलीकरण, निजीकरण व हिन्दी, हास्य व्यंग्य के रंग एवं तोल के बोल।
लेखन :पत्र-पत्रिकाओं में लेखन तथा दूरदर्शन, आकाशवाणी तथा कवि सम्मेलनों में काव्य पाठ संपादन राजभाषिका, उपक्रम भारती, सर्जना।
स्तम्भ लेखन : मैट्रोटच, गुजराती बोल (हिन्दी साप्ताहिक), दुर्गम ख़बर, एवं हमारा मैट्रो।
सम्बद्धता : सदस्य सचिव, नगर राजभाषा कार्यान्वयनसमिति (उपक्रम) वडोदरा।
"

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