| ऐसी कैसी नींद – यह कविता संग्रह अपने-आप में एक अभिव्यक्ति है। भगवत रावत ने अपने कहन में अपने निजी पक्ष की अनदेखी नहीं की है बल्कि कहा जाये कि निजी होना कविता का स्वभाव है तो उचित होगा। इसी स्वभाव की पुष्टि इस संग्रह में की जा रही है। मन के भेद, भीतर के गीत, ख़ुद में ख़ुद को देखना, पीड़ा के प्रति दृष्टिकोण आदि कुछ ऐसी भावनाएँ हैं जो इन कविताओं में स्पष्ट रूप से दिखाई दी हैं। यह संग्रह पढ़ते हुए ऐसा प्रतीत होता है जैसे संसार जिन भावनाओं से अछूता रह जाता है वो भावनाएँ कला और साहित्य की सबसे बड़ी शक्ति होती हैं। |
| ऐसी कैसी नींद – यह कविता संग्रह अपने-आप में एक अभिव्यक्ति है। भगवत रावत ने अपने कहन में अपने निजी पक्ष की अनदेखी नहीं की है बल्कि कहा जाये कि निजी होना कविता का स्वभाव है तो उचित होगा। इसी स्वभाव की पुष्टि इस संग्रह में की जा रही है। मन के भेद, भीतर के गीत, ख़ुद में ख़ुद को देखना, पीड़ा के प्रति दृष्टिकोण आदि कुछ ऐसी भावनाएँ हैं जो इन कविताओं में स्पष्ट रूप से दिखाई दी हैं। यह संग्रह पढ़ते हुए ऐसा प्रतीत होता है जैसे संसार जिन भावनाओं से अछूता रह जाता है वो भावनाएँ कला और साहित्य की सबसे बड़ी शक्ति होती हैं। |
| author | Bhagwat Rawat (भगवत रावत) |
|---|---|
| publisher | Vani Prakashan |
| language | Hindi |
| pages | 114 |













